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साध्वी ने बताया सामायिक में बैठने का तरीका

धर्मसभा का आयोजन

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साध्वी ने बताया सामायिक में बैठने का तरीका

साध्वी ने बताया सामायिक में बैठने का तरीका

बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में गुरु दिवाकर केवल दरबार मकाना गार्डन में विराजित साध्वी डॉ. चन्दना ने कहा
सामायिक में कैसे बैठना, किस आसन में बैठना, यह सर्वप्रथम ज्ञात करना चाहिए। सामायिक में सही तरीके से बैठने का महत्व स्पष्ट करने के लिए हम यह जानें कि नमोत्थुणं के पाठ में विशेष मुद्रा में क्यों बैठा जाता है। यह कैसे समझना कि हम सही मुद्रा में पाम में बैठ गए हैं। सामायिक में बांया मस्तिष्क निष्क्रिय और दायां मस्तिष्क सक्रिय होना चाहिए। जब तक बायां मस्तिष्क सक्रिय रहेगा, तब तक उसमें तर्क और गणित चलते रहेंगे। किसी प्रकार की भावनात्मक स्थिति नहीं बन पाएगी। नमोत्थुणं की मुद्रा हमारे दाएं मस्तिष्क को सक्रिय करती हैं। इस मुद्रा में बैठते ही हमारा बायां स्वर चालू हो जाता है। बायां मस्तिष्क सक्रिय है या दायां मस्तिष्क, यह पता नहीं लगाया जा सकता है। लेकिन नमो की सही मुद्रा में बैठने पर सब सही हो जाता है। सही मुद्रा यह है कि अपनी एडी और टखने पर शरीर का भार आ जाना चाहिए। एड़ी बिल्कुल सीधी रहनी चाहिए। उस समय हमारी जो मेरिडियन नाड़ी है उस पर दबाव पड़ता है और वाम शक्ति प्रवाह निरुद्ध हो जाता है और दक्षिण प्रवाह प्रारंभ हो जाता है। इसलिए, नगोत्थुणं की मुद्रा यानी कि बायां घुटना ऊपर, दायां घुटना नीचे दबा हुआ और एड़ी पीछे दबी हुई है। इस मुद्रा के साथ ही दायां मस्तिष्क सक्रिय हो जाता है। इससे व्यक्ति के अंदर जो भौतिक पदार्थों के प्रति आकर्षण और तर्क है, उन पर विराम लग जाता है और वह साधना की भावभूमि पर पहुंच जाता है। यह है नमोत्थुणं की मुद्रा का रहस्य। साधना में सही मुद्रा का बहुत महत्व है। इस अवसर पर संपतराज ढिलीवाल के 11 उपवास के व महेंद्र नाहर के 7 उपवास के प्रत्याख्यान हुए। संघ की ओर से अभिनंदन किया गय़ा। गुरु अम्बेश संघ के कई गुरु भक्त मंगलवार को साध्वीवृन्द के दर्शन के लिए पहुंचे।