
आत्मा का ज्ञान पाने के लिए बनते हैं संत
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में गोडवाड़ भवन में शनिवार को उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि के सान्निध्य में रमणीक मुनि ने धर्म सभा को संबोधित किया। मुनि ने 'मेरी भावना' के तीसरे पद के भावार्थ में कहा कि संतों की शरणसिंह रावत को क्षमता, आत्मबोध व स्वरूप की जानकारी मिल सकती है जो आंख में, भाव में रहते हैं उन्हें देखकर उनके जैसा बनने का प्रयास करना चाहिए। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह परिवार, समाज, संघ, संपर्क सूत्र के साथ जिंदगी चलाता है। इस समाज के आधार पर चातुर्मास, व्रत, धर्म, क्रियाएं होती है।
उन्होंने कहा कि आत्मा का ज्ञान प्राप्त करने के लिए ही संत बनता है या अच्छे लोगों के साथ रहने से अच्छे बुरे विवेक का बोध होता है। विचारों में पवित्रता तथा जीवन समुचित हो जाता है। संतों के सानिध्य में रहने से व्यक्ति दुख में भी अनुकूल होता है। मुनि ने अभिभावकों को अपने बच्चों को धर्म स्थलों व संतों का अधिकाधिक सान्निध्य प्रदान करने की प्रेरणा दी।
प्रारंभ में उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि ने मंगलाचरण किया। रमणीक मुनि ने ओंकार का सामूहिक उच्चारण व जैन धर्म के चारों संप्रदायों की जय करवाई। ऋषि मुनि ने गीतिका सुनाई। पारस मुनि ने मांगलिक प्रदान की। सहमंत्री सुरेशचंद मुथा ने बताया कि तपस्वी बबीता जैन का सिद्धितप के पारणे पर सम्मान किया गया। महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने सभी का आभार जताया।
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लंदन में तेरापंथ भवन का उद्घाटन आज
बेंगलूरु. तेरापंथ सभा विजयनगर के मंत्री कमल तातेड़ ने लंदन में श्रमणी चैतन्य प्रज्ञा, ज्योति प्रज्ञा, पुण्य प्रज्ञा, हिम प्रज्ञा, उन्नत प्रज्ञा, रत्ना प्रज्ञा व जिज्ञासा प्रज्ञा के दर्शन कर सुख साता पूछी। तातेड़ ने बताया कि लंदन में तेरापंथ भवन का जैन विश्व भारती के नाम से रविवार को उद्घाटन होगा। उन्होंने बताया कि लंदन में शनिवार व रविवार को स्थान उपलब्धता पर 200-250 लोगों को दो सत्रों में प्रेक्षा ध्यान, भक्ताम्बर व प्रवचन लाभ दिया जाता है। इसमें अन्य समुदाय के लोग भी लाभ लेते हैं।
Published on:
23 Sept 2018 06:30 pm
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