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संघर्ष ही सफलता की कुंजी: आचार्य देवेन्द्र सागर

राजाजीनगर में प्रवचन

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बेंगलूरु. संघर्ष ही जीवन है विषय पर विचार रखते हुए आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने सलोत जैन आराधना भवन में कहा कि जीवन संघर्ष का ही दूसरा नाम है। इस सृष्टि में छोटे-से-छोटे प्राणी से लेकर बड़े-से-बड़े प्राणी तक, सभी किसी-न-किसी रूप में संघर्षरत हैं। जिसने संघर्ष करना छोड़ दिया, वह मृतप्राय हो गया। जो इन संघर्षों का सामना करने से कतराते हैं, वे जीवन से भी हार जाते हैं, जीवन भी उनका साथ नहीं देता।

आचार्य ने कहा कि सफलता व कामयाबी की चाहत तो सभी करते हैं, लेकिन उस सफलता को पाने के लिए किए जाने वाले संघर्षों से कतराते हैं। सफलता सबको आकर्षित भी करती है, लेकिन उस सफलता की प्राप्ति के लिए किए जाने वाले संघर्ष को कोई नहीं देखता, न ही उसकी और आकर्षित होता है, जबकि सफलता तक पहुंचने की वास्तविक कड़ी वह संघर्ष ही है।

हम जिन व्यक्तियों को सफलता की ऊंचाइयों पर देखते हैं, उनका भूतकाल अगर हम देखेंगे तो पाएंगे कि यह सफलता बहुत संघर्ष से प्राप्त हुई है ।

वास्तव में जब व्यक्ति अपने संघर्षों से दोस्ती कर लेता है, प्रसन्नता के साथ उन्हें अपनाता है, उत्साह के साथ चलता है तो संघर्ष का सफर उसका साथ देता है और उसे कठिन-से-कठिन डगर को पार करने में मदद करता है।