
सत गुरु आंगण आया ओ वारी जाऊं रे
मैसूरु. घांची समाज के तत्वावधान में कामटगेरी मोहल्ला स्थित समाज भवन में शुक्रवार रात को गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष में एक शाम गुरु पूरणदास महाराज के नाम भजन संध्या व रात्रि जागरण का आयोजन हुआ। प्रारंभ में पूरणदास महाराज की तस्वीर पर माल्र्यापण कर ज्योत प्रज्वलित कर पूजा अर्चना की गई।
इसके बाद कलाकार राजू भाई पटेल व पार्टी ने भजन मैं थाने सिवरु गजानंद देवा..., गुरु बिन घोर अंधेरा संतों..., मैं अरज करूं गुरु थाने..., शरणों में राखो म्हाने, वारी जाऊं ओ गुरों बलिहारी जाऊं..., सत गुरु आंगण आया ओ वारी जाऊं रे... की मधुर प्रस्तुति दे माहौल को भक्तिमय बनाया।
सभा में बच्चों, महिलाओं ने भाग लिया। इस दौरान समाज के जवरीलाल भाटी, पारसमल घांची, तुलसीराम भाटी, हेमाराम बोराणा, प्रकाश निकुंभ व अन्य समाजों से ओगडऱाम सिरवी, गणेशराम आंजणा, जेठूसिंह राठौड़, बाबूलाल राठौड़ सहित बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।
उपधान से होती है देवगुरु की भक्ति
मैसूरु. सुमतिनाथ जैन संघ के तत्वावधान में महावीर भवन में जैनाचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने कहा कि उपधान द्वारा आत्मा के स्वभाव का सर्जन, विभव दशा का विसर्जन और आत्म शुद्धि का उपार्जन कर सकते हैं। उपधान से देव गुरु की भक्ति होती है। उन्होंने कहा कि श्रावक जीवन के अलंकार स्वरूप जो अणुव्रत होते हैं उनमें भी आंशिक पापों का त्याग होता है। अधिकांश पापों की तो अविरति ही होती है, परंतु वो ही श्रावक जब सामायिक और पौषध में होता है, तब उसके जीवन में से अधिकांश पापों की विरती सहजता से हो जाती है, क्योंकि सामायिक और पौषध में श्रावक साधु जैसा बन जाता है।
मंगलाचरण से दु:खों का नाश
मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, सिद्धार्थनगर में श्रुत मुनि ने कहा कि भगवती सूत्र में किसी भी कार्य को प्रारंभ करने से पहले नवकार मंत्र का पाठ करने से कार्य में कोई बाधा, अवरोध, दु:ख, संकट आया हो तो मंगलाचरण से समस्त दु:खों का नाश होकर वातावरण मंगलमय हो जाता है। उन्होंने कहा कि मंगल में 'मं' का मतलब मनन करना, 'ग' का मतलब गमन करना और 'ल' का मतलब लक्ष्य को पाना है। रविवार को महिलाओं के लिए शिविर होगा।
Published on:
29 Jul 2018 05:06 pm
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