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सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के परीक्षण के दौरान पैदा हुईं अप्रत्याशित परिस्थितियां

2000 केएन वाला इंजन बढ़ाएगा एलवीएम-3 की पे-लोड क्षमता, रोका गया परीक्षण

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सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के परीक्षण के दौरान पैदा हुईं अप्रत्याशित परिस्थितियां

सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के परीक्षण के दौरान पैदा हुईं अप्रत्याशित परिस्थितियां

बेंगलूरु.
अत्याधुनिक प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 (जीएसएलवी मार्क-3) की प्रक्षेपण क्षमता बढ़ाने के लिए विकसित किए जा रहे सेमीक्रायोजेनिक इंजन का पहला परीक्षण अनचाही परिस्थितियों के कारण बीच में ही रोकना पड़ा। इंजन का हॉट टेस्ट 4.5 सेकेंड की छोटी अवधि के लिए किया जाना था लेकिन, 1.9 सेकेंड बाद ही टरबाइन दबाव में अप्रत्याशित वृद्धि और गति में भारी गिरावट को देखते हुए परीक्षण रोक दिया गया।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा है कि, 2000 केएन (किलो न्यूटन) बल पैदा करने वाले (थ्रस्ट) इस इंजन का परीक्षण तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रणोदन परिसर (आइपीआरसी) में किया गया। पहले परीक्षण का उद्देश्य 4.5 सेकंड की छोटी अवधि के लिए हॉट-फायरिंग कर गैस जनरेटर, टर्बो पंप, प्री-बर्नर और नियंत्रक उपकरणों और महत्वपूर्ण उप प्रणालियों के एकीकृत प्रदर्शन को मान्य करना था। परीक्षण के दौरान मुख्य टरबाइन को चलाना था जो ईंधन और ऑक्सीडाइजर पंप को चलाता है। इसके लिए प्री-बर्नर कक्ष में प्रज्वलन और गर्म गैसों का उत्पादन होना चाहिए। इन तमाम चीजों पर परीक्षण में फोकस किया गया। परीक्षण 1.9 सेकेंड तक पूर्व अनुमानित मानदंडों के अनुरूप रहा। लेकिन, दूसरे सेकेंड में टरबाइन दबाव में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही टरबाइन की गति कम हो गई। एहतियाती कदम उठाते हुए परीक्षण को रोक दिया गया।
इसरो ने कहा है कि परीक्षण में आई समस्या का विश्लेषण हो रहा है। इससे समस्या को समझने में मदद मिलेगी और उसी आधार पर अगला हॉट टेस्ट होगा। सेमीक्रायोजेनिक इंजन में प्रणोदक के तौर पर तरल ऑक्सीजन (एलओएक्स) और केरोसिन का प्रयोग होता है। यह इंजन एलवीएम-3 की पे-लोड क्षमता बढ़ाने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। फिलहाल एलवीएम-3 अधिकतम चार टन वजनी उपग्रहों को भू-तुल्यकालिक अंतरण कक्षा (जीटीओ) में स्थापित करने की योग्यता रखता है। सेमी क्रायोजेनिक इंजन के विकास के बाद वह 6 से 10 टन वजनी उपग्रहों को जीटीओ में पहुंचाने की योग्यता हासिल कर लेगा। योजना के मुताबिक सेमी क्रायोजेनिक इंजन एलवीएम-3 में तरल चरण एल-110 की जगह लेगा जबकि, तीसरा चरण क्रायोजेनिक अपर स्टेज सी-25 ही रहेगा। इस रॉकेट का पहला चरण एस-200 होता है जिसमें ठोस प्रणोदक का इस्तेमाल किया जाता है। सेमी क्रायोजेनिक इंजन के परीक्षण के लिए आइपीआरसी में हाल ही में एक अलग केंद्र की स्थापना की गई है।