
कर्नाटक में सरकार के लिए चुनौती बने सत्ता के कई केंद्र
बेंगलूरु. सत्ता के कई केंद्र कांग्रेस-जनता दल-एस गठबंधन सरकार के लिए चुनौती बन रहे हैं। मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिलने से असंतुष्ट कांग्रेस नेता एचके पाटिल, एमबी पाटिल, सतीश जारकीहोली के गुट अभी सक्रिय बने हैं।
इसके अलावा राज्य के कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या, केएच मुनियप्पा, बीके हरिप्रसाद, डीके शिवकुमार, सांसद डीके सूरेश, शामनूरु शिवशंकरप्पा, एसआर पाटिल अपने-अपने समर्थकों के माध्यम से दबाव की राजनीति से सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। आलाकमान से स्पष्ट सूचना मिलने के बावजूद इन राजनेताओं के समर्थक विधायकों का अलग-अलग बैठकों का सिलसिला जारी है।
शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले को हरी झंडी मिलने के बाद कांग्रेस-जद-एस के नेताओं के बीच अपने पसंदीदा प्रशासनिक अधिकारियों को नियुक्त करने की होड़ शुरू हो गई है।
सूत्रों के अनुसार तबादलों को लेकर कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार तथा जद-एस के नेता एचडी रेवण्णा के बीच तनाव कम नहीं हुआ है। शिवकुमार के अलावा जद-एस के मंत्री भी उनके विभागों में रेवण्णा के हस्तक्षेप से नाराज बताए जा रहे हैं।
तबादलों के मामले को लेकर कांग्रेस तथा जद-एस के नेता विधानसौधा तथा विकास सौधा के गलियारों में सक्रिय हैं।
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संघ की सलाह: विप में नेता प्रतिपक्ष का स्थान उत्तर कर्नाटक को मिले
बेंगलूरु. बीते दिनों शंकरपुरम में स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यालय केशवकृपा में संघ तथा प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई बैठक में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष का पद विधान परिषद सदस्य अरुण शाहपुर को तथा उपनेता का पद रघुनाथराव मल्कापुरे को देने का सुझाव दिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद येड्डियूरप्पा को तथा सचेतक का पद सुनील हेगड़े को मिलने से विप में उत्तर कर्नाटक के भाजपा नेताओं को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया है। सूत्रों का कहना है संघ के वरिष्ठ अधिकारी मुकुंद ने येड्डियूरप्पा के कई फैसलों को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल से शिकायत की है।
Published on:
24 Jun 2018 07:58 pm

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