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आगम ज्ञान का महासागर है: आचार्य मुक्तिसागर

इस मौके पर धार्मिक पाठ्यक्रम भाग 4 का विमोचन जयमल डी शाह द्वारा किया गया

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आगम ज्ञान का महासागर है: आचार्य मुक्तिसागर

बेंगलूरु. आदिनाथ जैन श्वेतामबर मंदिर ट्रस्ट चिकपेट में आचार्य मुक्तिसागर सूरी, आचार्य जयचंद्रसागर सूरी आदि की निश्रा में मुनि अचलरत्नसागर सूरी को जैन दर्शन के 45 आगमों में सर्वोपरि आगम पंचमांग भागवती सूत्र की योग साधना में प्रवेश करवाया गया।

आचार्य मुक्तिसागर ने कहा कि साढ़े छह माह तक लगातार चलने वाले इस वृहद योग विधान के अंत में मणि पंन्यास पदारुद करने का भी शास्त्र मत है। मुनि अजित चंद्र सागर ने कहा कि 36 हजार प्रश्रों एवं 15 हजार श्लोक प्रमाण का यह आगम अपने आप में ज्ञान का एक महासागर है। इस मौके पर धार्मिक पाठ्यक्रम भाग 4 का विमोचन जयमल डी शाह द्वारा किया गया। ट्रस्ट अध्यक्ष उत्तमचंद भंडारी ने आभार ज्ञापित किया। ट्रस्ट देवकुमार जैन, गौतम सोलंकी आदि भी उपस्थित थे।

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जिनवाणी ही आत्मा को जगाने में सक्षम
बेंगलूरु. महावीर भवन अलसूर में जयधुरन्धर मुनि ने प्रवचन में कहा कि कर्मों को बांधता भी जीव है और काटना भी उसी जीव को ही है। यह ज्ञान होते ही आत्मा में सम्यक पुरुषार्थ जागृत होती है। उन्होंने कहा कि आत्मा में अनंत शक्ति है परंतु कर्मों के भार के कारण यह आत्मा अनंत काल से दबी हुई सुप्त अवस्था में है। आत्मा तो सिंह के समान है। बस इसे जगाना है।

मात्र जिनवाणी ही इस सोई आत्मा को जगाने में सक्षम है। हम भाग्य के भरोसे नहीं रहें। हम पुरुषार्थी बनेंं। हमारे अच्छे कर्म पुण्य का निर्माण करते हैं। यही पुण्य हमें सम्यक पुरुषार्थ में सहयोग करते हैं। पुण्य और पुरषार्थ उस रेल पटरी के समान है जो हमें गन्तव्य तक पहुंचाते हैं। कर्म ही हमारे परिभ्रमण को बढ़ाते हैं। सभा के प्रारंभ में संघ मंत्री चन्द्रप्रकाश मुथा ने सभी का स्वागत किया।

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खुशी को कल पर नहीं टालें
चामराजनगर. डॉ समकित मुनि ने शनिवार को धर्मसभा में कहा कि दौड़ का नाम संसार है और स्वयं के भीतर ठहर जाना धर्म है। दौडऩा यानी उधार की जिंदगी जीना और रुकना यानी नगद का जीवन जीना है। उन्होंने कहा कि अभी तक जो हम जीवन जी रहे हैं वह उधार का जीवन है, हमारा हंसना और रोना दोनों ही उधार का है।

दूसरा व्यक्ति जब चाहे हमें हंसा सकता है जब चाहे रुला भी सकता है। जब तक हम उधार का जीवन जीते हैं तब तक जीवन से हम संतुष्ट हो नहीं सकते। इसलिए उधार का नहीं, नगद का जीवन जीएं। जीने में आनंद मनाएं। जीवन जीने में आनंद नहीं ले पाएं तो कहीं पर भी हम आनंद से नहीं रह सकते। अपनी खुशी को कल पर मत टालें, उसे आज ही मनाएं।

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