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शाहीन विज्ञान पीयू कॉलेज अब हुब्बल्ली में भी

बीदर के कीर्ति शाहीन विज्ञान पीयू कॉलेज की ओर से हुब्बल्ली में सना शैक्षिक तथा सामाजिक सेवा संस्थान के सहयोग से इस संस्थान की सेवाएं अब हुब्बल्ली शहर के विद्यार्थियों को भी मिल सकेंगी।

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शाहीन विज्ञान पीयू कॉलेज अब हुब्बल्ली में भी

शाहीन विज्ञान पीयू कॉलेज अब हुब्बल्ली में भी

हुब्बल्ली. बीदर के कीर्ति शाहीन विज्ञान पीयू कॉलेज की ओर से हुब्बल्ली में सना शैक्षिक तथा सामाजिक सेवा संस्थान के सहयोग से इस संस्थान की सेवाएं अब हुब्बल्ली शहर के विद्यार्थियों को भी मिल सकेंगी। संस्था के संचालक का कहना है कि शाहीन एक प्रतिष्ठित व सफल शिक्षा संस्थान है।

इस संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने वाले अधिकांश विद्यार्थी नीट की परीक्षा पास कर सरकारी मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला पा चुके हैं। संस्थान की ओर से निर्मित कॉलेज की इमारत ६० हजार वर्गफीट में बनी हुई है। कॉलेज का कैम्पस दो एकड़ क्षेत्र में फैला है। उनका कहना है कि शाहीन कॉलेज आधुनिक शिक्षा प्रणाली एवं बेहतरीन पृष्ठभूमि के आधार पर शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।


शहर के नामी उद्यमी अशरफ अली के कुशल नेतृत्व में शाहीन संस्थान पारंपरिक तौर-तरीकों व छात्रों की एकाग्रता को बनाए रखने के उद्देश्य से मोबाइल रहित व्यावहारिक एवं प्रायोगिक तरीके से अध्ययन करवा रहा है।
छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शाखा व कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। व्याख्याताओं व विद्यार्थियों के लिए समय-समय पर व्यक्तित्व विकास के लिए अनुभवी विशेषज्ञों की ओर से ऑनलाइन कक्षाएं भी चलाई जा रही हैं।

शाहीन शिक्षा संस्थान की शुरुआत १९८९ में हुई। तीस साल से लगातार शानदार प्रदर्शन की बदौलत ही शाहीन विज्ञान कॉलेज से कई छात्रों ने डॉक्टर व इंजीनियर बनकर अपने सपनों को साकार करने के साथ ही संस्थान का नाम भी रोशन किया है। वर्तमान में देश भर में शाहीन कॉलेज की ३६ शाखाएं शिक्षा के माध्यम से देश व समाज की सेवा कर रही हैं। वर्तमान में कॉलेज से १२००० छात्र शिक्षा अर्जित कर रहे हैं। वर्ष २०१८ शैक्षणिक सत्र में ३०४ छात्र एईईसी की मैरिट में स्थान पा चुके हैं। इन छात्रों में विनीत मेगुर ने राज्य में आठवां प्राप्त किया।

मन को भटकाते हैं राग और द्वेष
इलकल (बागलकोट). श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में महावीर भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए जैन साध्वी इन्दुप्रभा ने कहा कि मानव जीवन पूर्व भव की पुण्यवाणी से मिला है।
दुर्लभ कहे जाने वाले मानव जीवन का मिलना तभी सार्थक होगा जब हम अपना आत्मलोकन करते हुए अंतरंग में उतरेंगे। खुद को ही खुद का दर्शन करना होगा और यह तभी संभव है जब धर्म क्रियाओं में मन, वचन, काया से संपूर्ण लीन हो जाएंगे। मन की चंचलता राग और द्वेष की वृत्तियों से चलायमान रहती है। राग और द्वेष मन को इधर-उधर भटकाते हैं। चंचल मन पर नियंत्रण पाने के लिए संपूर्ण श्रद्धा व आस्था के साथ धर्म की क्रियाएं करने की आवश्यकता है। जब हम सच्चे मन से अपनी आत्मा में झांकने का प्रयास करेंगे तभी आत्मा के दर्शन संभव है।


साध्वी वृद्धिप्रभा ने कहा कि मानव हमेशा अपने भूतकाल के बारे में ही सोचता है और बोलता है, जबकि आवश्यकता वर्तमान के बारे में सोचने की है। हम धर्म की साधना करते हैं पर मन कहीं से कहीं भटकता रहता है तो साधना कैसे होगी? जो भी काम करते हैं उसके प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होना जरूरी है। जब सत्संग आदि करते हैं तो उस समय उसमें संपूर्ण रूप से लीन हो जाइए। श्रद्धा तथा सच्ची लगन से किए गए कार्यों में सदैव सफलता प्राप्त होती है। सिंधनूर के श्रावकों ने साध्वियों के दर्शन किए। स्वागत श्रीसंघ के अध्यक्ष सज्जनराज मेहता ने किया। अंत में साध्वी शशिप्रभा ने मंगलपाठ किया।