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शंखेश्वर भावयात्रा में उमड़े श्रद्धालु

शंखेश्वर पाŸवनाथ भगवान की इस प्रतिमा का निर्माण गत चौबिसी में हुए दामोदर प्रभु के उपदेश से आषाढ़ी श्रावक ने किया था

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शंखेश्वर भावयात्रा में उमड़े श्रद्धालु

धर्मसभा में शंखेश्वर तीर्थ के इतिहास व प्रकटप्रभावी पाŸवनाथ भगवान के प्रभाव बताए

मैसूरु. पाŸववाटिका के आराधना भवन में जैनाचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर की निश्रा में गुरुवार को शंखेश्वर भावयात्रा का आयोजन हुआ।
धर्मसभा में शंखेश्वर तीर्थ के इतिहास व प्रकटप्रभावी पाŸवनाथ भगवान के प्रभाव बताते हुए जैनाचार्य ने कहा कि विश्व में महान प्रभाविक अतिप्राचीन इंद्र देवों द्वारा असंख्य वर्षों तक पूजित तेईसवें तीर्थंकर शंखेरवर पाŸवनाथ प्रभु की प्रतिमा गुजरात के शंखेश्वर महातीर्थ के देवविमान तुल्य जिनालय में प्रतिष्ठित है।

शंखेश्वर पाŸवनाथ भगवान की इस प्रतिमा का निर्माण गत चौबिसी में हुए दामोदर प्रभु के उपदेश से आषाढ़ी श्रावक ने किया था। परमात्मा के प्रताप से आत्मा के काम, क्रोध, विकार, वासनाएं नष्ट हो जाती हैं, तो शरीर के रोगों का शमन होना स्वभाविक बात है। कार्यक्रम का लाभ सुमेरमल मुथा परिवार ने लिया।

कार्यक्रम में अशोक दांतेवाडिया, प्रवीण दांतेवाडिय़ा, बाबूलाल मुणोत, मंगलचंद पोरवाल संतोष आदि उपस्थित थे। 30 जून को पाŸव वाटिका से बाजे गाजे के साथ आचार्य आदेश्वर वाटिका पहुंचेंगे।

जीवन को सार्थक बनाना जरूरी
बेंगलूरु. यशवंतपुर स्थानक में साध्वी वीरकांता की शिष्या साध्वी हितिका ने गुरुवार को प्रवचन में कहा कि जिंदगी मिलती है कुछ कर गुजरने के लिए, जागकर कुछ करने के लिए, लेकिन हम इसे बर्बाद कर देते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन क्या है, हम अपनी बाउंड्री तक कब पहुंच जाते हैं, पता ही नहीं चलता। कुछ लोग ऐसे ही भोग विलास में जीवन समाप्त कर देते हैं।

कुछ लोग धर्म ध्यान में जीवन को लगाकर सफल बना देते हंै। जीवन को सार्थक करने के लिए जागना जरूरी है। साध्वी वीणा ने कहा कि लोग वाणी से ही दुश्मन बन जाते हंै और बोली से ही दोस्त बन जाते है। संघ मंत्री रमेश बोहरा ने बताया कि साध्वी के प्रवचन प्रतिदिन सुबह 9 बजे से होंगे। उनका वर्षावास चामराजपेट में है और चातुर्मास मंगलप्रवेश 21 जुलाई को होगा। अध्यक्ष सुमेरसिंह मुणोत ने स्वागत किया।