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जगने के लिए शास्त्र चक्षु आवश्यक है-साध्वी चैतन्यश्री

धर्मसभा का आयोजन

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जगने के लिए शास्त्र चक्षु आवश्यक है-साध्वी चैतन्यश्री

जगने के लिए शास्त्र चक्षु आवश्यक है-साध्वी चैतन्यश्री

बेंगलूरु. वर्धमान श्वेतांबर स्थानकवासी जैन श्रावकसंघ शांतिनगर में चातुर्मास संपन्न कर शांतिनगर क्षेत्र में विहार कर रही साध्वी चैतन्यश्री शुक्रवार सुबह रमेशचंद, धर्मेन्द्रकुमार कोठारी के यहां पहुंचीं। इस अवसर पर साध्वी चैतन्यश्री ने धर्म संदेश में कहा कि जागृत बनकर ही धर्म साधना की जा सकती है और अपने आत्मा के परम लक्ष्य मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है। साध्वी ने कहा कि जहां सोने वाले को जगाना आसान है लेकिन सोने का नाटक करने वाले को जगाना थोड़ा मुश्किल है। जगने के लिए शास्त्र चक्षु आवश्यक है। साध्वी ने कहा कि प्रभु की आज्ञा के मुताबिक जीवन जीना यह शास्त्र चक्षु है। उन्होंने कहा कि जीवन में स्नेह चक्षु भी होना जरूरी है। वह जगत के लिए होना चाहिए। गुरु के प्रति समर्पण चक्षु होना चाहिए। मोह राजा को हृदय से निकालकर जिनराज को हृदय में स्थान देना चाहिए। साध्वी ने कहा कि ट्रेन कभी चोरी नहीं होती, क्योंकि वह पटरी कभी नहीं छोड़ती है। वैसे ही हमारा अध्यात्म रूपी धन कभी चोरी नहीं हो सकता है। क्योंकि वह हमारी जागृत आत्मा से जुड़ा हुआ होता है। हमें अपने अध्यात्म रूपी धन की रक्षा करने के लिए देव, गुरु, धर्म रूपी पटरी को कभी नहीं छोडऩा चाहिए।