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लोस-विस उपचुनाव परिणाम के संकेत : शिवकुमार का बढ़ा कद

डीके उस समय राजनीति में चमके जब वर्ष 198 9 में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा को उनके मजबूत गढ़ कनकपुरा में ही शिकस्त देकर जायंट किलर बने।

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DK shivkumar

लोस-विस उपचुनाव परिणाम के संकेत : शिवकुमार का बढ़ा कद

बेंगलूरु. कांग्रेस के संकटमोचक कहे जाने वाले डीके शिवकुमार फिर एक बार अपनी ठोस रणनीति के बलबूते बल्लारी में भाजपा का किला फतह करने में कामयाबी हासिल की। बल्लारी की इस जीत से पार्टी में शिवकुमार का कद फिर एक बार बढ़ेगा।

दरअसल, डीके उस समय राजनीति में चमके जब वर्ष 198 9 में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा को उनके मजबूत गढ़ कनकपुरा में ही शिकस्त देकर जायंट किलर बने।

वर्ष 2004 में जब एक पत्रकार से राजनीति में आई तेजस्विनी रमेश ने फिर एक बार कनकपुरा (अब बेंगलूरु ग्रामीण) में एचडी देवेगौड़ा को पराजित की तो देवेगौड़ा की उस हार में भी इसी नायक का हाथ रहा।

वोक्कालिगाओं के कद्दावर नेता एचडी देवेगौड़ा जैसी अपनी धमक बनाने वाले शिवकुमार कांग्रेस के मुसीबत के काम आने वाले नेता हैं।

वर्ष 2002 में जब महाराष्ट्र की विलासराव देशमुख सरकार पर संकट आया तो कर्नाटक का यहीं संकटमोचक काम आया। तब विधान पटल पर बहुमत साबित करने से पहले डीके ने महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायकों को यहां ईगलटन रिसोर्ट में ठहराया और देशमुख कामयाब हुए।

एक बार फिर अहमद पटेल के राज्य सभा चुनावों से पहले वहीं स्थिति बनी और शिवकुमार फिर एक बार गुजरात के विधायकों को ईगलटन रिसोर्ट में आगुवानी कर पटेल की जीत सुनिश्चित की।

उन्हें बल्लारी लोकसभा चुनाव का प्रभारी तब बनाया गया जब पार्टी में काफी असंतोष था। लेकिन, उन्होंने 14 साल बाद फिर एक बार बल्लारी जीतकर कांग्रेस की झोली में डाल दी।

भले ही इस बार यह चुनाव जद-एस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन में लड़ा गया मगर जद-एस का यहां कोई जनाधार नहीं है। निश्चित तौर पर बल्लारी की जीत में डीके की रणनीति फिर एक बार पार्टी के काम आई। ऐसे में संकटमोचक का कद बढऩा लाजिमी है।