
कोकून के मूल्यों में गिरावट से रेशम उत्पादक नाराज
संजय कुलकर्णी
बेंगलूरु. देश के आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्मिम बंगाल तथा महाराष्ट्र इन रेशम उत्पादक राज्यों में कर्नाटक पहले स्थान पर है। देश के रेशम उत्पादन में 50 फीसदी रेशम का उत्पादन कर्नाटक में होता है। कर्नाटक रेशम उत्पादन में पहले स्थान पर है। वर्ष 2017-18 में कर्नाटक में 10 हजार मेट्रिक टन से अधिक रेशम का उत्पादन हुआ था। आज भी रेशम की मांग के अनुपात में आपूर्ति नहीं होने के कारण चीन से रेशम आयात करना पड़ रहा है। लेकिन रेशम के कोकून के खरीदी दाम लगातार गिरने से रेशम उत्पादक किसानों में आक्रोश है।
कोकून मंडी में किसानों का विरोध प्रदर्शन
गुरुवार को रामनगर, शिड्लघट्टा जैसे प्रमुख रेशम कोकून खरीदी मंडी में खरीदी मूल्यों की गिरावट से भड़के रेशम उत्पादक किसानों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए यहां कोकून खरीदी पर रोक लगा दी थी। विरोध प्रदर्शन के दौरान कई रेशम उत्पादक किसानों ने सामूहिक आत्महत्या करने की चेतावनी दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस तथा नेताओं ने मुख्यमंत्री एच.डी.कुमारस्वामी से बात कराने का आश्वासन देकर किसानों पर प्रदर्शन वापस लेने का दवाब बनाया था।
कोकून के दाम क्र 100-150 प्रति किलो
गत माह में रेशम कोकून का मूल्य 400 रुपए से अधिक था। इस सप्ताह में मंडी में एक किलो कोकून का खरीदी मूल्य 100-150 रुपए घोषित किए जाने पर गुस्साए किसानों ने इतने कम मूल्य पर कोकून बेचने के इनकार कर धरना दिया। किसानों के आक्रोश को देखते हुए रेशम ककून की ई-नीलामी खरीदी दो घंटे रोकने की नौबत आ गई।
रामनगर जिले के कृष्णापुर दोड्डी के निवासी रेशम उत्पादक किसान चन्निगरायप्पा के मुताबिक एक किलो रेशम के कोकून के उत्पादन का खर्चा ही 350 से 400 रुपए तक आता है। इसे 100 से 150 रुपए किलो के भाव कैसे बेचा जा सकता है? इससे तो किसानों को उत्पादन की लागत भी नहीं मिलेगी लिहाजा उत्पादन खर्च ध्यान में रखते हुए उचित तरीके से खरीदी मूल्य निर्धारित किया जाए। अन्यथा रेशम उत्पादक किसान इस घाटे के कारोबार से दूर रहना ही पसंद करेंगे।
राज्य किसान संघ के नेता कोडिहल्ली चंद्रशेखर के मुताबिक बेंगलूरु ग्रामीण, रामनगर, चिकबल्लापुर, कोलार, तुमकूरु जिलों के अलावा उत्तर कर्नाटक तथा हैदराबाद-कर्नाटक के कई जिलों में अब रेशम उत्पादन किया जा रहा है। इस पर सैकड़ों किसान परिवार निर्भर हैं। रेशम कोकून का न्यूनतम खरीदी मूल्य निर्धारण कर राज्य सरकार को रेशम उत्पादक किसानों के हितों की रक्षा करनी चाहिए। अगर राज्य सरकार ने तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया तो यह उद्योग ही चरमरा जाएगा। राज्य में गत 10 वर्षों से रेशम उत्पादन किसान यहां हो रहें घाटे के कारण रेशम उत्पादन से दूर हो रहें है। इस उद्योग से सैकड़ों लोगों को रोजगार मिल रहा है। लिहाजा राज्य सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सही खरीदी मूल्य का निर्धारण करना चाहिए। रेशम उत्पादकों को राहत दिलाने के लिए कोकून के लिए प्रोत्साहन मूल्य घोषित किया जाना चाहिए।
Published on:
11 Oct 2018 06:51 pm

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