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अगले महीने से ग्रीन लाइन पर भी दौड़ेगी छह कोच वाली मेट्रो

नम्मा मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों को व्यस्तम अवधि के दौरान अगले साल मार्च के बाद राहत मिल सकती है।

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अगले महीने से ग्रीन लाइन पर भी दौड़ेगी छह कोच वाली मेट्रो

अगले महीने से ग्रीन लाइन पर भी दौड़ेगी छह कोच वाली मेट्रो

बेंगलूरु. नम्मा मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों को व्यस्तम अवधि के दौरान अगले साल मार्च के बाद राहत मिल सकती है। मेट्रो रेल निगम के ५० में २५ ट्रेनों को अगले साल के मध्य तक तीन से छह कोच (मेट्रो कार) वाले परिवर्तित कर दिया जाएगा। अगले महीने तक ग्रीन लाइन पर छह कोच वाली ट्रेन का परिचालन शुरू किया जाएगा।


मेट्रो रेल निगम के अधिकारियों ने यह घोषणा गुरुवार को मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी के विधानसौधा (डॉ. बीआर आंबेडकर) मेट्रो स्टेशन पर छह कोच वाली तीसरी मेट्रो को हरी झंडी दिखाने के बाद की। मेट्रो रेल निगम के प्रबंध निदेशक अजय सेठ ने कहा कि छह कोच वाली मेट्रो से व्यस्तम अवधि के दौरान यात्रियों को राहत मिलेगी। सेठ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगले महीने छह कोच वाली दो और ट्रेनों का परिचालन शुरू होगा और इसमें एक ट्रेन का परिचालन ग्रीन लाइन पर भी किया जाएगा। यलचेनहल्ली-नागसंद्र के बीच ग्रीन लाइन पर अभी तीन कोच वाली ट्रेन का ही परिचालन होता है और अगले महीने पहली बार बार पर इस खंड पर छह कोच वाली ट्रेन का परिचालन किया जाएगा। अभी तीनों ट्रेनों का परिचालन पर्पल लाइन (बैयप्पनहल्ली-मैसूरु रोड) के बीच ही किया जाता है।


अब तक सिर्फ ग्रीन लाइन पर छह कोच वाली ट्रेन का परिचालन किए जाने के बारे में पूछे गए सवाल पर सेठ ने कहा कि यात्री भार के कारण ऐसा किया गया। व्यस्तम अवधि के दौरान ग्रीन पर लाइन पर औसत यात्री भार १० हजार रहता है जबकि पर्पल लाइन पर यह १९ हजार ५०० रहता है। इसी कारण पर्पल लाइन छह कोच वाले मेट्रो ट्रेनों को चलाया गया ताकि यात्रियों को सफर करने में ज्यादा परेशानी नहीं हो।

अब यात्रियों की मांग पर ग्रीन लाइन पर भी छह कोच वाली मेट्रो चलाई जाएगी। दिसम्बर के अंत यह सुविधा उपलब्ध हो जाने की संभावना है। ग्रीन लाइन खंड पर वाणिज्य गतिविधियां कम और आवासीय क्षेत्र अधिक हैं। इस मार्ग पर यात्रियों की संख्या अधिक होने पर छह बोगियों की ट्रेन बढ़ाई जा सकती हैं।
सेठ ने कहा कि तीन कोच वाली ट्रेन में ९७५ यात्री सफर कर सकते हैं जबकि छह कोच वाली ट्रेन में २००२ यात्री सफर कर सकते हैं। मौजूदा तीन कोच वाले ट्रेनों की क्षमता बढ़ाने के लिए मेट्रो रेल निगम मे इनमेंं तीन इंटरमीडिएट कोच जोड़ रही है।


यह पूछे जाने पर कि क्या छह कोच वाली ट्रेनें भविष्य में यात्री भार बढऩे पर कितनी प्रभावी रहेगी, सेठ ने कहा कि नम्मा मेट्रो के कोचों का संयोजन जिस तकनीकी डिजाइन से किया गया है उसमें कोचों की अधिकतम संख्या छह ही रह सकती है। लिहाजा ट्रेनों की यात्री क्षमता बढ़ाने के बजाय हम उसके फेरे बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। व्यस्तम अवधि या अधिक यात्री भार होने पर हर दो मिनट ट्रेनों का परिचालन करने का लक्ष्य है।


साल भर में पूरा बेड़ा छह कोच का
मेट्रो रेल निगम ने राज्य सरकार को सूचित किया है सभी ट्रेनों को छह कोच में परिवर्तित करना अगले साल के दिसम्बर तक संभव हो सकेगा। पहले निगम मार्च २०१९ तक सभी ५० ट्रेनों को छह कोच वाले मेंं परिवर्तित करने की बात कहता रहा है। सेठ ने कहा कि मार्च २०१९ तक २५ ट्रेनों को छह कोच वाले में परिवर्तित कर दिया जाएगा। चौथी छह कोच वाली ट्रेन का परिचालन अगले तीन सप्ताह में हो जाएगा जबकि पांचवी ट्रेन दिसम्बर के अंत में परिचालित होगी। उन्होंने कहा कि सरकारी क्षेत्र की कंपनी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीइएमएल) अगले साल अगस्त तक सभी इंटरमीडिएट कोचों की आपूर्ति कर देगी और अगले साल के अंत तक सभी ट्रेनें कोच को हो जाएंगी। बीइएमएल ने हर माह तीन से चार कोच की आपूर्ति के लिए मेट्रो रेल निगम से करार किया है।


मेट्रो ने इस साल २२ जून को छह कोच वाली पहली मेट्रो का परिचालन किया था जबकि दूसरी मेट्रो का परिचालन ४ अक्टूबर को शुरू हुआ। छह कोच वाली मेट्रो मेें लोको पायलट की केबिन के बाद पहला कोच महिला यात्रियों के लिए आरक्षित रहता है। मेट्रो निगम का कहना है कि तीन कोच वाले की तुलना मेें छह कोच वाले ट्रेन में १५ फीसदी ऊर्जा की बचत होती है। गौरतलब है कि छह कोच वाले ट्रेन का परिचालन शुरू होने के बाद मेट्रो में यात्रियों की संख्या बढ़ी है। अभी रोजाना औसतन करीब ४ लाख लोग मेट्रो में सफर करते हैं। पिछले महीने त्योहारों के दौरान एक दिन में सर्वाधिक ४.४९ लाख लोगों के सफर का कीर्तिमान बना था।


मुख्यमंत्री कुमारस्वामी अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त रहने के कारण करीब एक घंटे विलंब से समारोह में पहुंचे और सुबह करीब ११.४४ बजे विधानसौधा स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-१ पर बैयप्पनहल्ली जाने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री डॉ जी परमेश्वर, महापौर गंगाम्बिका मल्लिकार्जुन, सांसद पी सी मोहन, विधान पार्षद टी ए सवरण्णा, मेट्रो के निदेशक (रोलिंग स्टॉक व इलेक्ट्रिकल) एन एम ढोके, कार्यकारी निदेशक (वित्त) दीप कोटिस भी उपस्थित थे।

फेज २ के लिए अभी ५ साल इंतजार : २०२३ में पूरा होगा निर्माण
नम्मा मेट्रो फेज-२ के पूरे ७२ किलोमीटर के खंड का निर्माण अब वर्ष-२०२० के बदले वर्ष-२०२३ तक पूरा होगा। मेट्रो रेल निगम ने पहले फेज-२ के निर्माण की समय सीमा वर्ष २०२० निर्धारित की थी लेकिन अब इसकी समय सीमा बढ़ाकर २०२३ कर दी गई है। हालांकि, नागरिकों के लिए संतोष की बात है कनकपुर रोड और मैसूरु रोड में मेट्रो के विस्तारित खंड (क्रमश: यलचेनहल्ली से अंजनापुर एवं मैसूरु रोड से केंगेरी) पर वर्ष २०२० में मेट्रो परिचालन शुरू होने की संभावना है।


सेठ ने कहा कि फेज-२ का निर्माण कार्य फरवरी २०१६ में आरंभ हुआ है। सरकार की ओर से प्राप्त स्वीकृति के बाद से तय प्रावधानों के हिसाब से निर्माण कार्य आरंभ होने के पांच वर्ष के भीतर परियोजना पूरी की जानी चाहिए। निर्माण कार्य उसी आधार पर गतिमान है और वर्ष २०२१ तक फेज-२ के एक बड़े हिस्से पर मेट्रो चलने लगेगी।


उन्होंने कहा कि वाइटफील्ड मेट्रो लाइन पर वर्ष २०२१ और इलेक्ट्रॉनिक सिटी लाइन पर वर्ष २०२२ में पूरी तरह से परिचालन शुरू हो जाएगा। वहीं कनकपुर रोड और मैसूूरु रोड विस्तारित खंड पर वर्ष-२०२० से परिचालन शुरू हो जाएगा। हालांकि, गोट्टिगेरे और नागवार मेट्रो लाइन पर परिचालन के लिए वर्ष-२०२३ तक इंतजार करना होगा।


इस खंड पर निर्माण कार्य के वर्ष २०२३ तक खिंचने का मतलब है कि नागवरा से केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (केआइए) तक मेट्रो विस्तार की परियोजना में भी देरी हो सकती है। वहीं तुमकूरु रोड में बेंगलूरु अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी केन्द्र (बीआइइसी) तक मेट्रो विस्तार की परियोजना अब वर्ष-२०२१ तक खिंच जाएगी।


भूमिगत खंड की निविदा का इंतजार
निर्माण कार्य में देरी की वजह पर सेठ ने कहा कि मुख्य रूप से गोट्टिगेरे से नागवारा खंड में देरी हो रही है। इस खंड पर एलिवेटेड निर्माण कार्य आरंभ हो चुका है लेकिन भूमिगत निर्माण कार्य में वेल्लारा जंक्शन से टेनेरी रोड के लिए निविदा प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है लेकिन अगले दो महीनों में निविदा प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य तकनीकी और डिजाइन को अंतिम रूप देने का काम दिसम्बर तक पूरा हो जाएगा।


केआइए के लिए तय होना है रूट
अधिकारियों ने कहा कि गोट्टिगेरे-नागवारा खंड में निर्माण कार्य में देरी होने का सीधा असर अब केआइए तक मेट्रो विस्तार पर पड़ेगा। हालांकि, केआइए के लिए अभी रूट को अंतिम रूप देना शेष है। नागवारा से केआइए के लिए निर्धारित वाया आरके हेगड़े नगर और जक्कूर मार्ग में उच्च दबाव वाले पेट्रोलियम लाइन के होने के कारण अब इसके रूट निर्धारण को बदला जा सकता है। सेठ के अनुसार राज्य सरकार को रूट तय करना है जिसके बाद निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू होगी।