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पृथ्वी से टकरा सकता है लघु ग्रह, होगा महाविनाशकारी

धरती से किसी लघु ग्रह के टकराने की आशंका को लेकर वैज्ञानिक सतर्क हैं। अगर कोई लघु ग्रह धरती से टकराता है तो वह महाविनाशकारी होगा।

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पृथ्वी से टकरा सकता है लघु ग्रह, होगा महाविनाशकारी

नासा में चल रहा महामंथन
वैज्ञानिक कर रहे एहतियाती कदमों पर विचार
बेंगलूरु. धरती से किसी लघु ग्रह के टकराने की आशंका को लेकर वैज्ञानिक सतर्क हैं। अगर कोई लघु ग्रह धरती से टकराता है तो वह महाविनाशकारी होगा। इसलिए इस तरह की किसी घटना को टालने के लिए नासा में 29 अप्रेल से 3 मई तक विचारों का महामंथन चल रहा है। दरअसल, वर्ष 2029 में पृथ्वी के बेहद करीब से एक लघु ग्रह एपोफिश गुजरने वाला है। लेकिन, वैज्ञानिकों ने पूर्व तैयारियों के मद्देनजर एक ऐसे लघु ग्रह की कल्पना की है जो वर्ष 2027 में पृथ्वी से टकरा सकता है।

भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर (सेनि) रमेश कपूर ने बताया कि सौरमंडल में मंगल एवं बृहस्पति की कक्षाओं के बीच लाखों की संख्या में छोटे-छोटे पिंड एक चौड़ी बेल्ट के रूप में सूर्य का चक्कर लगाते हैं। इन्हें लघु ग्रह कहते हैं। दस मीटर से बड़े आकार का कोई भी पिंड लघु ग्रह कहा जाएगा। इनकी कक्षाएं 2 एयू से 4 एयू (एयू यानी खगोलीय इकाई अर्थात सूर्य और पृथ्वी के बीच की औसत दूरी 15 करोड़ किमी) के बीच स्थित हैं। इन दोनों ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में अनेक लघु ग्रह पृथ्वी की निकट कक्षाओं में आ गए हैं। वे लघु ग्रह जिनका आकार 100 मीटर या अधिक है और अपने विचरण के दौरान ये हमसे 75 लाख किलोमीटर के भीतर आ जाते हैं, बेहद खतरनाक लघु ग्रह कहलाते हैं। वर्तमा में ऐसे 196 7 पिंडों की जानकारी है। इनकी कक्षाओं की गणना भी कर ली गई है और जाहिर है ये संख्या बढ़ती जा रही है।

टकराव रोकने के उपायों पर चर्चा
प्रोफेसर कपूर ने बताया कि इधर कुछ वर्षों में अनेक लघु ग्रह पृथ्वी के बेहद नजदीक से होकर गुजरे हैं। हाल ही में 26 मार्च को एक लघु ग्रह ‘2019 पीडीसी’ खोजा गया। वास्तव में यह एक कल्पित लघु ग्रह है और इसकी कक्षा दीर्घवृत्ताकार है जिसपर चलता हुआ यह पृथ्वी से केवल 0.05 एयू से गुजरता है। आरंभिक गणनाओं के अनुसार 8 साल बाद यह 29 अप्रेल 2027 के दिन पृथ्वी से टकरा सकता है। टकराव होगा -इस बात की संभावना 1 फीसदी है किंतु शून्य नहीं है। ऐसे में पृथ्वी वासियों की क्या तैयारी होनी चाहिए इस पर नासा ने 29 अप्रेल से 3 मई के दौरान एक विशेष गोष्ठी का आयोजन किया है। इसका नाम है प्लेनेटरी डिफेंस कांफ्रेंस (ग्रह रक्षा गोष्ठी)। इसे अमरीका में मैरीलैंड में आयोजित किया गया है। नासा की एक प्रयोगशाला जेपीएल ने ऐसे टकराव की आशंकाओं को देखते हुए एक काल्पनिक परिदृश्य बनाया है।

जिसके अनुसार ऐसे किसी भी लघु ग्रह का पता चलने के बाद क्या-क्या कदम उठाए जाएंगे। पता चलने के बाद के हफ्तों में ऐसे लघु ग्रह की कक्षा और प्रकृति का पता लगाया जाता है और यह तय किया जाता है कि भविष्य में इसकी पृथ्वी से टकराने की कितनी संभावना है। यदि टकराव की संभावना हो तो निकट आ जाने पर यह पृथ्वी के किस भाग में गिरेगा। स्पष्ट है ऐसी स्थिति बेहद विनाशकारी होगी। वैज्ञानिक इसके चाल-चलन के आधार पर एक रिस्क कोरिडोर निर्धारित करेंगे। जबकि हम ऐसे लघु ग्रहों पर लगातार नजर बनाए रखेंगे, या ऐसी स्थिति आ ही जाए तो इससे कैसे निपटा जाएगा। नासा की इस गोष्ठी का यही उद्देश्य है।

पथ से विचलित करना एक विकल्प
इसका सबसे बेहतरीन हल है लघु ग्रह को उसके पथ से थोड़ा विचलित कर देना। इसके लिए अनेक उपाय बताए गए हैं। एक अंतरिक्षयान इससे टकराया जा सकता है या इसके पास से पहुंचकर इसके साथ ही कक्षा में स्थापित हो सकता है और अपने सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण से इसका पथ थोड़ा सा बदल सकता है। परमाणु बम से उड़ा दिए जाने जैसे हल भी प्रस्तावित किए गए हैं किंतु वैज्ञानिक इसके पक्ष में नहीं है। जाहिर है ऐसी किसी भी समस्या का सामना सभी देशों को मिलकर करना होगा।

वर्ष 2029 में एपोफिश बनेगा खतरा
वर्ष 2027 का खतरा तो काल्पनिक है किंतु इसके दो साल बाद का खतरा एपोफिश नामक लघु ग्रह से तो है ही। उस वर्ष 13 अप्रेल को यह पृथ्वी से 37 हजार 8 74 किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। टकराव की संभावना बेहद कम है लेकिन ये बातें अब तक की गणनाओं के आधार पर हैं। गौरतलब है कि 15 फरवरी 2013 को रूस में चेल्याबिंस्क में हुई उल्का घटना से 1200 लोग घायल हुए और अनेक भवनों को नुकसान पहुंचा जबकि इस लघु ग्रह का आकार केवल 19 मीटर था और यह 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर ही फट गया था। इसके अग्निबाण से निकली ऊर्जा 500 किलोटन की थी यानी, 1945 के पमाणु बम से 25 गुणा ज्यादा।