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छोटे उपग्रह ने किया बड़ा कमाल

नैनो उपग्रह आईएनएस-1सी में स्वदेशी तकनीक से विकसित धातु के ओरिगेमी पे-लोड का पहली बार प्रयोग किया जिसके शानदार परिणाम सामने आए हैं।

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ISRO

बेंगलूरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने हाल ही में छोड़े गए नैनो उपग्रह आईएनएस-1सी में स्वदेशी तकनीक से विकसित धातु के ओरिगेमी पे-लोड का पहली बार प्रयोग किया जिसके शानदार परिणाम सामने आए हैं। इससे भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों में नैनो और सूक्ष्म उपग्रहों के उपयोग की संभावनाएं बढ़ गई हैं।


नैनो उपग्रह आईएनएस-1सी में एक पे-लोड (वैज्ञानिक उपकरण) मल्टी स्पेक्ट्रल टेक्नोलॉजी डिमॉनस्ट्रेशन (एमएमएक्स-टीडी) भेजा गया जिसे अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी) अहमदाबाद, ने तैयार किया था। इस पे-लोड ने 23 मीटर आकार के एक छोटे से भूखंड का 29 किमी गुणा 29 किमी रिजोल्यूशन में स्तब्ध कर देने वाली रंगीन तस्वीर भेजी। धरती से 505 किमी की ऊंचाई पर धु्रवीय सूर्य-समकालिन कक्षा में परिक्रमा करते हुए नैनो उपग्रह के इस छोटे से पे-लोड द्वारा भेजी गई लाल, हरा और नीले रंग में यह तस्वीर इसरो की तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करता है।


इस कैमरे द्वारा भेजे गए आंकड़े स्थलाकृतियों के मानचित्रण, वनस्पितियों की निगरानी और क्षोभमंडल में फैले प्रदूषक एरोसोल के अध्ययन में बेहद कारगर साबित हो रहे हैं। आईएनएस-1 सी एक एक्सपेरिमेंटल उपग्रह है जिसे पीएसएलवी सी-40 से 30 अन्य उपग्रहों के साथ 12 जनवरी 2018 को छोड़ा गया था। भारतीय नैनो उपग्रहों (आईएनएस) की श्रृंखला का यह तीसरा उपग्रह है। इससे पहले इस श्रृंखला के दो उपग्रह आईएनएस-1 ए और आईएनएस-1बी फरवरी 2017 में पीएसएलवी सी-37 से छोड़े गए थे।


जापानी ओरिगेमी तकनीक का उपयोग
इस नवीनतम पे-लोड के विकास के लिए जापानी ओरिगेमी तकनीक का उपयोग किया गया। ओरिगेमी कागज को तह लगाने की एक ऐसी तकनीक है जिससे उसकी मोटाई काफी कम रहती है। इसरो के नैनो उपग्रह आईएनएस-1सी की पे-लोड टीम ने उसी तकनीक का उपयोग करते हुए अपवर्तक कैमरों की डिजाइनिंग की जिससे उसकी मोटाई काफी सीमित रही। कई तहों में तैयार की गई अॅाप्टिकल संरचना को ही ओरिगेमी ऑप्टिक्स कहते हैं जिसका उपयोग इसरो वैज्ञानिकों ने किया।


परावर्तक कैमरों में सामान्य शीशे की जगह धातु के शीशे का उपयोग किया जाता है जिससे स्पेक्ट्रल कवरेज में उसकी उपयोगिता काफी बढ़ जाती है। इसके लिए इसरो धातु के शीशे का विकास और एसेंबलिंग स्वदेशी तकनीक से किया।


इसरो ने कहा है कि छोटे आकार और न्यूनतम भार के कारण कॉम्पैक्ट इमेजिंग प्रणाली नैनो और सूक्ष्म उपग्रहों के लिए अंतरिक्ष मिशनों अंतरग्रहीय मिशनों में काफी उपयोगी साबित होगा। अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र और इसरो के केंद्रों में ऐसी तकनीकों के विकास कार्यक्रम सतत रूप से चल रहे हैं। इससे इनोवेटिव पे-लोड तैयार हो रहे हैं। गौरतलब है कि नई तकनीकों के विकास के साथ उपग्रहों का आकार छोटा होता जा रहा और सेवाएं बेहतर मिल रही हैं।