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संसार में अध्यात्म व आत्मा ही सार

सर्वधर्म दिवाकर रमणीक मुनि ने ओमकार का उच्चारण कराया
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संसार में अध्यात्म व आत्मा ही सार

बेंगलूरु. स्थानीय गोड़वाड़ भवन में वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में शनिवार को आयोजित धर्मसभा में कर्नाटक गजकेसरी गुरु गणेशीलाल के 139वें जयंती समारोह पर गुणानुवाद सभा हुई।

रविंद्र मुनि ने मंगलाचरण किया व खद्दरधारी संत की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इससे पूर्व सर्वधर्म दिवाकर रमणीक मुनि ने ओमकार का उच्चारण कराया।

रमणीक मुनि ने मेरी भावना रचना के माध्यम से प्रवचन में कहा कि हम आत्मा और अध्यात्म के तल पर जीवन को देखने समझने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस नश्वर संसार में कोई सार है तो अध्यात्म और आत्मा है। इन दोनों के अलावा सब नश्वर है जबकि आत्मा ही ईश्वर है। मुनि ने कहा कि प्रेम और मोह में जमीन आसमान जितना अंतर है।

यह एक दूसरे के पर्यायवाची नहीं बल्कि यह विरोधी अर्थात आग और पानी के समान शब्द हैं। रमणीक मुनि ने कहा प्रेम में धर्म है तो मोह में पाप है। एक में प्रकाश है तो दूसरे में अंधेरा है। एक में होश है तो दूसरे में बेहोशी है।

एक में बौद्ध है तो दूसरा अबोध बना देता है। प्रेम और मोह की विपरीतता को ध्यान में रखना जरूरी है। उप प्रवर्तक पारसमुनि ने मांगलिक प्रदान की। पुष्पेंद्र मुनि ने गीतिका प्रस्तुत की।

संचालन चिकपेट शाखा के महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने किया। धर्म सभा में शहर के विभिन्न नगरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

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