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अब चंद्रयान-4 पर काम कर रहा इसरो: चांद से लाया लाएगा मिट्टी का नमूना!

यह देखते हुए कि योजना कुछ अलग करने की है, पहली बात यह तय की गई है कि चंद्रयान-4 में कम से कम चंद्रमा की मिट्टी का एक नमूना होना चाहिए, जिसे पृथ्वी पर वापस लाया जाए। रोबोटिक तरीके से होगा इसलिए इस पर विमर्श चल रहा है।

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बेंगलूरु. भारतीय अंतरिक्ष्द्वा अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-4 मिशन के प्रक्षेपण की योजना पर आंतरिक रूप से चर्चा शुरू कर दी हैं और इस संबंध में एक नोवल डिजाइन और 'उच्च-स्तरीय तकनीक' विकसित की जा रही है। पिछले साल अगस्त में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक उतारने के बाद, इसरो ने चंद्रमा की सतह से मिट्टी पृथ्वी पर लाने का एक और जटिल मिशन तैयार किया है।

इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने शनिवार को जीएसएलवी-एफ14 से इनसैट-3डीएस उपग्रह के सफल प्रक्षेपण के बाद कहा कि बेंगलूरु मुख्यालय वाली अंतरिक्ष एजेंसी चंद्रयान 3 मिशन की सफलता के बाद भविष्य में चंद्रयान 4, 5, 6 और 7 मिशन भेजना चाहती है। सोमनाथ ने कहा, हम इस पर काम कर रहे हैं कि चंद्रयान-4 अंतरिक्ष यान में क्या होना चाहिए। पहला सवाल यह है कि चंद्रयान-4 में (पेलोड के रूप में) क्या होना चाहिए, यही वह सवाल है जो हम पूछ रहे हैं।

कुछ अलग करने की योजना

उन्होंने कहा, यह देखते हुए कि योजना कुछ अलग करने की है, पहली बात जो हमने तय की वह यह कि चंद्रयान-4 में कम से कम चंद्रमा की मिट्टी का एक नमूना होना चाहिए, जिसे पृथ्वी पर वापस लाया जाना है। हम इसे रोबोटिक तरीके से करना चाहते हैं। इसलिए इसी पर विमर्श चल रहा है।

पिछले मिशन से दोगुना होगा काम

सोमनाथ ने कहा, इस वक्त हम सभी यह विचार कर रहे हैं कि उपलब्ध रॉकेटों के साथ यह काम कैसे किया जाएगा। आप जानते हैं कि चंद्रमा पर जाना, नमूना वापस लाना बहुत जटिल काम है। वहां उतरना नहीं (चंद्रयान -3 मिशन की तरह)। बल्कि इस बार वहां जाने के बाद एक और रॉकेट को चंद्रमा से वापस लाने के लिए उड़ान भरना है, पृथ्वी पर वापस आना है और पृथ्वी पर उतरना है, जो पिछली बार किए गए काम से दोगुना है। उन्होंने कहा, लेकिन, आज हमारे रॉकेट अभी ऐसा करने में पूरी तरह से सक्षम नहीं हैं। इसलिए, इस वजह से हम एक नए डिजाइन की कोशिश कर रहे हैं, जिसके बारे में मैं आपको अभी नहीं बताएंंगा, यह गोपनीय है।

उच्च स्तरीय तकनीक विकसित होगी

अंतरिक्ष विभाग के सचिव ने कहा, वैज्ञानिक चंद्रयान-4 मिशन के लिए एक उच्च स्तरीय तकनीक विकसित करेंगे। उन्होंने कहा कि इस मिशन को पूरा करने के लिए हम उच्च-स्तरीय तकनीक विकसित कर रहे हैं। सरकार की मंजूरी के बाद हम जल्द ही वापस आएंगे। हमें सरकार को बताना होगा कि (मिशन को पूरा करने का) यही तरीका है। पैसे की आवश्यकता है और फिर उन्हें मंजूरी देनी होगी। उसके बाद ही मैं बाहरी दुनिया को बता सकता हूं। कृपया तब तक प्रतीक्षा करें।

इनसैट-3डी उपग्रह होगा डीकमीशन

जीएसएलवी-एफ14 इन्सैट-3डीएस उपग्रह के आज के सफल प्रक्षेपण पर एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे वैज्ञानिक 2013 में प्रक्षेपित इनसैट-3डी उपग्रह को डीकमीशन कर देंगे क्योंकि इसकी कार्यप्रणाली खराब हो रही है। उन्होंने अधिक जानकारी दिए बिना कहा, हम इस उपग्रह (इनसैट-3डी) का उपयोग एक अलग उद्देश्य के लिए करेंगे और इसके बारे में बाद में सूचित करेंगे।