
बेंगलूरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ISRO अपने नव विकसित लघु रॉकेट 'एसएसएलवीÓ SSLV से दो उपग्रहों 'ईओएस-02Ó और 'आजादी सैटÓ AzadiSAT का प्रक्षेपण रविवार सुबह 9.18 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लांच पैड से करेगा। इसरो अधिकारियों ने बताया कि श्रीहरिकोटा का मौसम प्रक्षेपण के अनुकूल है।
इसरो के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक एसएसएलवी प्रक्षेपण के लिए केवल पांच घंटे की उलटी गिनती होगी, जो सुबह 4.18 बजे शुरू होगी। उलटी गिनती के दौरान एसएसएलवी के वेलोसिटी ट्रिमिंग मॉड्यूल (वीटीएम) में 50 किलोग्राम तरल ईंधन भरने के साथ-साथ अंतिम जांच प्रक्रियाएं होंगी। पीएसएलवी और जीएसएलवी प्रक्षेपण के लिए 25 से 26 घंटे की उलटी गिनती होती है।
इसरो का यह मिशन कई मायनों में ऐतिहासिक होगा। पीएसएलवी, जीएसएलवी मार्क-2 और मार्क-3 को सफलतापूर्वक ऑपरेशनल करने के बाद इसरो इस नए रॉकेट का पहला प्रायोगिक प्रक्षेपण होगा। इस रॉकेट के विकास से इसरो के पास सभी श्रेणी के उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए एक अलग रॉकेट उपलब्ध होगा।
सफलता पर टिकी सबकी निगाहें
अब इसरो के इतिहास में एक और रॉकेट एसएसएलवी जुड़ेगा, जो 10 से 500 किलोग्राम वजनी उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचाएगा। एसएसलवी के विकास पर देश के निजी उद्योगों की भी नजर है।
पहला मिशन, दो उपग्रह
अपने पहले मिशन 'एसएसएलवी डी-1/ईओएस-02Ó में यह नव विकसित रॉकेट दो उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करेगा। मुख्य पे-लोड भू-अवलोकन उपग्रह ईओएस-02 है जिसका कुल वजन 135 किलोग्राम है। दूसरा उपग्रह 'आजादी सैटÓ है, जिसका निर्माण देश के 75 स्कूलों की 750 छात्राओं ने किया है। 'आजादी सैटÓ का कुल वजन 8 किलोग्राम है और इसमें कुल 75 पे-लोड हैं। प्रत्येक पे-लोड का वजन लगभग 50 ग्राम है। प्रक्षेपण के 13 मिनट बाद दोनों उपग्रहों को एसएसएलवी धरती की कक्षा में स्थापित करेगा जिसपर पूरे देश की नजर है।
इसरो के रॉकेट इतिहास पर एक नजर
Published on:
07 Aug 2022 02:59 am
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