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योग के साथ आहार चर्या का भी रखें ध्यान-आर्य

पतंजलि योगपीठ कर्नाटक के प्रभारी से बातचीत

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योग के साथ आहार चर्या का भी रखें ध्यान-आर्य

योग के साथ आहार चर्या का भी रखें ध्यान-आर्य

योगेश शर्मा
बेंगलूरु. योग भगाए रोग, यह बात सही है। योग किसी भी प्रमाणिक योग शिक्षक की देखरेख में किया जाए को वह जहां रोग भगाता है। वहीं व्यक्ति को मजबूती प्रदान करता है। योग के साथ आहार का पालन करना भी जरूरी होता है। गलत समय में लिया आहार नुकसान देह भी साबित हो सकता है।
पतंजलि योगपीठ कर्नाटक के प्रांत प्रभारी व कर्नाटक योगासन फैडरेशन के राज्य अध्यक्ष भंवरलाल आर्य ने राजस्थान पत्रिका से विशेष भेंट में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जो लोग स्वस्थ हैं वे सामान्य व्यायाम, सूर्य नमस्कार, योगिक जौगिंग, भस्त्रिका प्राणायम, कपाल भांति, अनुलोम विलोक, भ्रामरी और उद्गीत प्राणायम के साथ और पांच से ग्यारह बार ऊँ का उच्चारण कर सकते हैं। ये छोटा सा पैकेज है। स्वस्थ व्यक्ति यदि प्रतिदिन ये योग आसन करता है तो वह और स्वस्थ रह सकता है।
आर्य ने कहा कि योग अभ्यास ८ से ८० वर्ष का प्रत्येक व्यक्ति कर सकता है। ध्यान रहे उस मनुष्य की शक्ति पर अतिक्रमण नहीं हो। अपने सामथ्र्य अनुसार यथायोग्य योग का अभ्यास करना चाहिए। योग करने के लिए सुबह का समय अति उत्तम होता है। वैसे दोपहर व शाम को भी योग किया जा सकता है। इसके लिए कोई मनाही नहीं है। सुबह के योग का जो लाभ मिलता है वह दोपहर व शाम के योग से नहीं मिल सकता है। भोजन के चार से पांच घंटे बाद योग करना चाहिए। योगाभ्यास करने के एक घंटे बाद स्नान करना चाहिए। योग के करीब आधा या एक घंटे बाद ही आहार लेना चाहिए।
आर्य ने कहा कि योग के साथ दिनचर्या का ध्यान रखा जाए तो योग के लाभ बेमिसाल मिल सकते हैं। उन्होंने योग के बाद सात्विक आहार लेने की प्रेरणा दी। सुबह के नाश्ते में अंकुरित अनाज, फल, सलाद का उपयोग किया जाए। दोपहर में रोटी व चावल, सलाद के साथ छाछ ले सकते हैं। रात के भोजन में भी हल्का भोजन लेने से एक योग साधक पूरा लाभ प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि योग व आयुर्वेद में कहा गया है कि सुबह का नाश्ता ८ से ९ बजे के बीच, दोपहर का भोजन १२ से २ बजे के बीच तथा रात का भोजन ६ से ८ बजे के बीच करना लाभदायी माना गया है। उस समय भोजन के पचने की पूरी संभावना रहती है।
किसी भी बीमारी से ग्रसित व्यक्ति किसी के कहने से या फिर अपने मन से योग बिल्कुल नहीं करें। क्योंकि हर एक व्यक्ति पर हर एक योग और आहार की पद्धति लागू नहीं होती है। सबकी प्रकृति अलग है और बीमारी में तो खासकर सभी को विशेष ध्यान रखना होता है। डायबिटीज, हाई बीपी या कोई अन्य बीमारी से ग्रसित व्यक्ति किसी भी प्रमाणित योगाचार्य या अपने वैद्य से परामर्श करने के बाद ही योग व आहार की पद्धति तय करें।