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बुराई छोड़ अच्छाई का मार्ग पकड़ें

जब तक प्राण होते हैं तब तक शरीर के अंग-उपांग कार्य करते हैं

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बुराई छोड़ अच्छाई का मार्ग पकड़ें

बेंगलूरु. जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में महावीर धर्मशाला में श्राावक के 12 व्रतों का विवेचन करते हुए जयधुरंधर मुनि ने कहा कि जिनवाणी नर को नारायण, पुरुष को पुरुषोत्तम, कंकर को शंकर, जीव को शिव और भक्त को भगवान बनाने का सामथ्र्य रखती है। उसके लिए साधक को बुराइयों से अच्छाइयों की ओर बढऩा होगा। दुर्गुणों को तज कर सद्गुणों को अपनाना होगा। अव्रती से व्रती बनना होगा। मुनि ने कहा कि आत्मा और शरीर के पारस्परिक संबंध होने से दोनों एक-दूसरे के पूरक होते हैं। जब तक प्राण होते हैं तब तक शरीर के अंग-उपांग कार्य करते हैं। मरणोपरांत कानों से सुना नहीं जाता, आंखों से देखा नहीं जाता, मुंह से बोला और खाया नहीं जाता। हाथ-पैर भी सक्रिय नहीं होते। इसलिए आत्मा की शुद्धि नितांत आवश्यक है। संचालन मिठालाल मकाणा ने किया।


पदार्थों की प्राप्ति के लिए साधना जरूरी
वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर में साध्वी संयमलता आदि ठाण 4 के सान्निध्य में बुधवार को अखण्ड 24 घंटे का महामंगलकारी ग्रह शांति अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर साध्वी ने कहा कि जप-तप-साधना द्वारा अपने अशुभ कर्मों का क्षय एवं पुण्य कर्मों का बंधन होता है। हजार साधन होने के बाद भी आदमी को शांति नहीं मिलती। पदार्थों की प्राप्ति के लिए साधना जरूरी है। मुसीबतें सारी खत्म होकर अधूरे काम पूरे होते हैं। सभी आराधकों ने मिलकर 24 घंटे में चार करोड़ से अधिक बार मंत्र का उच्चारण किया। तीर्थंकरों की स्तुति से मंडप गूंज उठा। संचालन ज्ञानचंद लोढ़ा ने किया।

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खाण्डल विप्र सभा का गठन

मैसूरु. केआरएस मार्ग पर स्थित सीरवी समाज भवन में बुधवार को खाण्डल विप्र सभा की आम सभा हुई। परशुराम की तस्वीर पर पुष्पहार पहनाकर कर व ज्योत प्रज्वलित कर पंडित राहुल शर्मा ने पूजा करवाई। इस अवसर पर नई कार्यकारीणी का गठन किया गया। अध्यक्ष देवप्रकाश रुथला, उपाध्यक्ष प्रमोद पिपलवा, सचिव राहुल रुथला, सह सचिव अशोक काछवाल, कोषाध्यक्ष मालचन्द सिहोटा बनाए गए।