
तपस्या का मतलब भूखा रहना नहीं अपितु भोजन की आसक्ति को छोडऩा
मैसूरु. मुनि प्रशांत कुमार, मुनि अमृत कुमार के सानिध्य में अक्षय तृतीया समारोह का आयोजन हुआ।
सभा में मुनि प्रशान्त कुमार ने कहा कि अक्षय तृतीया का दिन भगवान आदिनाथ की स्मृति का दिन है। उन्होंने गृहस्थ जीवन में राजतंत्र का सूत्रपात किया। स्वस्थ जीवन जीना है तो खाने का संयम करना चाहिए। क्रोध का वर्षीतप करना एक कठिन एवं बड़ा तप है। श्रावक जीवन में राग द्वेष से बचना श्रावकत्व का लक्षण होता है परिवार एवं समाज में सामंजस्य का भाव रखना चाहिये। प्रभु आदिनाथ का सम्पूर्ण जीवन दर्शन मानव विकास का दर्शन है।
डॉ. अमृत कुमार ने कहा कि साधु जीवन के एक अंग गोचरी भी अपने आप मे तप है। तपस्या करने से स्वाध्याय, ध्यान, जप एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति में समय का उपयोग हो जाता है। मुनि कुमुद कुमार ने कहा कि वर्षीतप का संबंध भगवान ऋषभ के साथ जुड़ा हुआ है। इस पर्व का मूल कारण कर्म का बंधन अंतराय कर्म का उदय। तपस्या का मतलब भूखा रहना नही अपितु भोजन की आसक्ति को छोडऩा। प्रभु ऋषभ का गृहस्थ एवं संयम जीवन दोनो ही हमें जीवंत संदेश देता है।
मुनि नरेश कुमार ने कहा कि समय का नियोजन कर अपनी आत्मा को पाप से धर्म की और प्रवर्त करें।
प्रमोद मेहता ने बताया कि मुनि अमृत कुमार का 18 वां एवं मंजूदेवी पितलिया ने पाँच वर्षीतप का समापन किया। सभाध्यक्ष महेंद्र नाहर ट्रस्ट अध्यक्ष प्रकाश दक तेयुप अध्यक्ष मुकेश गुगलिया खुशबु श्रीमाल नंजनगुड से रोशन लाल नंगावत ने विचार व्यक्त किए। सभा, तेयुप, एवं महिला मंडल द्वारा साहित्य एवं अभिनंदन पत्र द्वारा सम्मान किया गया। आभार ज्ञापन सभा मंत्री विनोद बुरड़ ने व्यक्त किया। संचालन मुनि नरेश कुमार ने किया।
Published on:
08 May 2019 05:41 pm
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