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जैन धर्म की प्रभावना सबसे बड़ा धर्म

धर्मसभा का आयोजन

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जैन धर्म की प्रभावना सबसे बड़ा धर्म

जैन धर्म की प्रभावना सबसे बड़ा धर्म

बेंगलूरु. महावीर स्वामी जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ त्यागराजनगर में विराजित आचार्य महेंद्रसागर सूरी ने कहा कि जैन धर्म की प्रभावना सबसे बड़ा धर्म है और जैन धर्म की हीलना अपभ्राजना निंदा सबसे बड़ा अधर्म है। हमें हमारी किसी धार्मिक प्रवृत्ति को देखकर किसी अन्य के दिल में जैन धर्म के प्रति आदर बहुमन भाव पैदा हो जाए तो यह सबसे बड़ी धर्म की प्रभावना है। तरण तारण तीर्थंकर परमात्मा की पावन प्रतिष्ठा के अवसर पर प्रभु भक्ति, गुरु भक्ति और साधर्मिक भक्ति के साथ जीव दया और अनुकंपादान किया जाता है वह धर्म प्रभावना और शासन प्रभावना का ही अंग है। प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर सभी का मुंह मीठा कराने के पीछे यही आशय होता है कि सभी के दिल में जैन धर्म के प्रति आदर भाव और पूज्य भाव पैदा हो। देव गुरु और धर्म के प्रति पनपा हुआ आदर भाव भी आत्मा में बोधि बीज का वपन कर देता है। दूसरी आत्माएं भी प्रभु शासन की रसिक बनें इस तरह की प्रवृत्तियां करने से उत्कृष्ट पुण्य का बंध होता है। जीव दया अनुकंपा दान आदि करें ऐसे पुण्यानुबंधी पुण्य का बंध होता है। अन्य को हमारी प्रवृत्ति से धर्म की अवहेलना करने का अवसर मिले ऐसी परिस्थितियां छोडऩी चाहिए।

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