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मोह का बंधन जबरदस्त होता है

दसवां व्यक्ति तुम खुद ही क्यों नहीं बन जाते और यह सुनकर वे पुन: मुनि बनकर जाने के लिए तैयार हो गए

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मोह का बंधन जबरदस्त होता है

मैसूरु. स्थानकवासी जैन संघ मैसूरु के तत्वावधान में सिटी स्थानक में डॉ समकित मुनि ने गुरुवार को महारानी चेलना की कथामाला को आगे बढ़ाते हुए नंदीषेण मुनि के मोह बंधन का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व के भोगावली कर्म के कारण तो वे मुनि से फिर गृहस्थी बने। उन्होंने कहा कि गृहस्थ में रहकर भी वे प्रतिदिन 10 व्यक्तियों को धर्म बोध देते हुए 7 वर्ष बीतने पर जब एक दिन 1 व्यक्ति कम हो गया तो उन्होंने अपने संकल्प के कारण भोजन नहीं किया तो उनकी पत्नी ने उन्हें यह कहा कि वह दसवां व्यक्ति तुम खुद ही क्यों नहीं बन जाते और यह सुनकर वे पुन: मुनि बनकर जाने के लिए तैयार हो गए।

उन्होंने कहा कि एक गणिका या वेश्या के घर पर रहकर भी दृढ़ संकल्पी नन्दीषेन ने कुल 12 वर्ष में लगभग पचास हजार व्यक्तियों को भोगी से योगी और कर्मी को धर्मी बनाया, फिर स्वयं भी अपनी आयु पूर्ण कर देव लोक में उत्पन्न हो गए। प्रारंभ में पूछीसूणम संपूठ का वाचन करवाया गया। भवांत मुनि, जयवंत मुनि ने तपस्वियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। लााभार्थियों का अभिनंदन किया गया।


स्वच्छंदता त्यागें और विनम्रता को अपनाएं
चामराजनगर. गुंडलपेट स्थानक में साध्वी साक्षी ज्योति ने प्रवचन में कहा कि जो विनम्र होते है, वे प्रसन्नता के साथ बड़ों के हुक्म को स्वीकार करते हैं क्योंकि उनकी सोच होती है कि बड़ों का हुक्म मेरे लिए आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि बड़ों के प्रत्येक कथन में हित चिंतन रहता है। वे जो भी कहते हैं, भले के लिए कहते हैं। जो बड़ों के अनुशासन को स्वीकार नहीं करते हैं, वे स्वच्छंद होते हैं।

वे बड़ों की आज्ञाओ में रहे राज को नहीं जान पाते हैं और उनकी आज्ञा को ठुकरा कर जगने वाले सौभाग्य को सुला देते हैं। उनका अहंकार उन्हें निम्न बना देता है। बड़ों की आज्ञा पर हृदय से समर्पण जग जाएगा तो हमें उनकी हर आज्ञा भेंट में मिला गुलाब लगेगा। अत: हम हमारे जीवन में रही स्वच्छंदता का पूर्णत: त्याग करें और विनम्रता को अपनाएं।

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