
बेंगलूरु. स्थानीय प्रशासन उपलब्ध कराने के मामले में पुणे देश में अव्वल है तो नम्मा बेंगलूरु की स्थिति सबसे खराब है। देश के 23 शहरों में जनाग्रह सेंटर फोर सिटिजनशिप एंड डेमोक्रेसी (जेसीसीडी) ने वर्ष 2017 का वार्षिक सर्वेक्षण जारी किया है जिसमें बेंगलूरु सबसे नीचे है। 5.1 अंक के साथ पुणे को पहला स्थान मिला है। पांच अव्वल शहरों में पुणे के बाद कोलकाता, तिरुवनंतपुरम, भुवनेश्वर एवं सूरत शामिल हैं। वार्षिक शहरी प्रशासन रैंकिंग में 10 अंक में से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ने 4.4 अंक के साथ छठा स्थान हासिल किया।
जेसीसीडी के अध्ययन मेें 20 राज्यों के 23 प्रमुख शहरों में शहरी स्थानीय निकायों के कार्य का विश्लेषण करके शासन की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया गया। कुल 10 अंक रखे गए थे लेकिन सभी शहर मात्र 3.0 अंक से 5.1 स्कोर के बीच रहे। यह सर्वेक्षण अन्य देशों के शहरों के प्रशासन से भारतीय शहरों की तुलना में था कि दुनिया के अन्य बड़े शहरों की तुलना में भारतीय महानगर कहाँ खड़े हैं? इसमें जोहांसबर्ग, लंदन और न्यूयार्क ने क्रमश: 7.6, 8.8 और 8.8 स्कोर हासिल किया है, वहीं भारतीय शहरों में पुणे का स्कोर सर्वाधिक 5.1 रहा।
हालांकि, राज्य सरकार के तमाम दावों के बाद भी बेंगलूरु का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। सूची में नीचे से पांच शहरों में बेंगलूरु सबसे नीचे और उसके बाद चंडीगढ, देहरादून, पटना और चेन्नई है। इन सभी शहरों ने 3 से 3.3 के बीच अंक हासिल किया है।
जेसीसीडी के सीईओ श्रीकांत विश्वनाथन ने सर्वेेक्षण रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट शहरी निकायों के अध्ययन और कानून, नीतियों और आरटीआई उत्तरों के विश्लेषण पर आधारित है। उन्होंने कहा, भारतीय शहर एक अनिश्चित स्थिति में हैं। हालांकि शहरों की स्थिति में एक मामूली सुधार हुआ है लेकिन वैश्विक दर की तुलना में यह धीमी है और भारतीय शहरों की समस्याएं बढ़ रही हैं।
समस्याओं का नहीं निकल रहा स्थायी समाधान
उन्होंने कहा कि हम चुनौतियों के सामना का समाधान धीमी गति से कर रहे हैं। अगर हम उच्च आर्थिक वृद्धि, नौकरी सृजन और लोगों की बेहतर गुणवत्ता प्रदान करने की आकांक्षाएं रखते हैं तो हमें इन समस्याओं का युद्ध स्तर पर समाधान तलाशना होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि दीर्घकालिक तौर पर एक उच्च गुणवत्तापूर्ण जीवन उपलब्ध कराने में हम पूरी तरह तैयार हो सकते हैं। हालांकि हमारे देश के शहरों की प्रशासन व्यवस्था का सबसे दुखद पहलू शहरों में बार बार आने वाली बाढ, कचरा संकट, आग की घटनाएं, इमारत हादसा, वायु प्रदूषण और डेंगू जैसी बीमारियों का बढता प्रकोप है। इस प्रकार की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होने के कारण ही भारतीय शहर अन्य वैश्विक शहरों की तुलना में कम स्कोर कर पाते हैं।
Published on:
15 Mar 2018 05:41 pm
बड़ी खबरें
View Allबैंगलोर
कर्नाटक
ट्रेंडिंग
