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मानव जीवन की सबसे बड़ी शक्ति विश्वास-साध्वी रिद्धिमा

धर्मसभा

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मानव जीवन की सबसे बड़ी शक्ति विश्वास-साध्वी रिद्धिमा

मानव जीवन की सबसे बड़ी शक्ति विश्वास-साध्वी रिद्धिमा

बेंगलूरु. राजाजीनगर जैन स्थानक में साध्वी रिद्धिमा ने कहा कि जीवन में हार उसी की होती है जो गिर कर उठना ना चाहे। दिल में अगर जज्बा , विश्वास हो तो कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है। मनुष्य को सहजता से पांच महत्वपूर्ण चीजें मिली हैं। प्रबल पुण्यवाणी के उदय से मनुष्य जन्म, आर्य क्षेत्र, उत्तम कुल, साधु-संतों का सुयोग और जिनवाणी और धर्म के प्रति श्रद्धा प्राप्त होती है। आत्म कल्याण के लिए यह चार दुर्लभ अवसर हमें मिले हैं। इनके बिना संसार से मुक्त होना असंभव है। मनुष्य की देह से ही साधना संभव है। मनुष्य धर्म पाकर भी जो धर्म शास्त्रों का श्रवण नहीं कर पाता, धर्म श्रवण करके भी जो मानव धर्म का श्रद्धापूर्वक आचरण नहीं कर पाता, उसका मनुष्य जन्म पाना भी निरर्थक हो जाता है। इन चारों भव की प्राप्ति से आत्मा परमात्मा पद पा लेती है। इस मनुष्य जन्म के कितने ही साल बीत गए फिर भी हम संभल नहीं पाए। परमात्मा ने कहा है कि हमें हर कार्य यतना से करना है। हमें यतना से बोलना और यतना से चलना और यतना से रहना है।
इसके पूर्व साध्वी अरहाश्री ने कहा कि विश्वास आपके जीवन को सार्थक बनाता है और अविश्वास आपके जीवन को निरर्थक बनाता है। लौकिक जीवन में श्रद्धा और विश्वास अगर है तो जीवन में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं होती है। इस अवसर पर विनयकुमार कानूंगा ने गीतिका प्रस्तुत की। श्रीरामपुरम संघ अध्यक्ष शांतिलाल खिंवेसरा, सुवालाल दक, राजाजीनगर संघ के अध्यक्ष भंवरीलाल चोरडिय़ा, ज्ञानचंद लोढ़ा, नेमीचंद दलाल, महावीरचंद डोसी, समरथ कोठारी, पप्पू कुम्हार व अन्य उपास्थित थे।