
जीव का स्वभाव है ऊपर की ओर उठना
बेंगलूरु. जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में महावीर धर्मशाला में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए जयधुरंधर मुनि ने कहा कि जिस तरह घर अलग होता है और उसमे रहने वाले लोग अलग होते हैं, म्यान और तलवार दोनों पृथक-पृथक होते हैं।
उसी प्रकार आत्मा और शरीर भी भिन्न है। अन्यत्व भावना के द्वारा साधक पराई अमानत में खयानत की बुद्धि नहीं रखता और वस्तु, धन, घर आदि को पराया मानता है।
गर्म दूध में नींबू के रस से दूध और पानी अलग-अलग हो जाते हैं। यह भावना आत्मा की शरीर के प्रति आसक्ति को कम कर देती है।
घंटाकर्ण स्तोत्र का जाप
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ हनुमंतनगर के तत्वावधान में साध्वी सुमित्रा के सान्निध्य में मंगलवार को घंटाकर्ण स्तोत्र का जाप किया गया। साध्वी सुप्रिया ने स्तोत्र के महत्व पर प्रकाश डाला।
साध्वी सुदीप्ति ने वीर स्तुति का पारायण करवाया। साध्वी सुमित्रा ने मंगलपाठ किया। शुक्रवार को कृतज्ञता ज्ञापन व विदाई समारोह होगा। सहमंत्री रोशनलाल बाफणा ने संचालन किया।
Published on:
21 Nov 2018 06:48 pm

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