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पार्क सरकारी उदासीनता का शिकार, लगा गंदगी का अंबार

-खेलना, घूमना तो दूर की बात, गुजरना भी मुश्किल -सुंदरता पर लगा ग्रहण, कूड़ाघर में तब्दील

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पेड़-पौधों के बीच शुद्ध वातावरण की लताशा में लोग पार्क पहुंचते हैं। बच्चे भी खेलकूद का आनंद लेते हैं। सेहतमंद रहते हैं, लेकिन यह पार्क अलग है। पार्क में हमेशा दुर्गंध आती रहती है। कूड़ा-करकट भी चारों तरफ फैला रहता है। गंदगी और बदबू के कारण पार्क में सैर करना तो दूर दो मिनट ठहरना भी मुश्किल होता है। नाम भले ही इसका पार्क है, लेकिन इस पार्क का वजूद बिल्कुल समाप्त होने के कगार पर है। इस पार्क में एक समय विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे हुआ करते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) इस पार्क के रखरखाव पर लाखों रुपए खर्च कर चुका है। बावजूद इसके पार्क की हालत बदतर होती जा रही है। हर जगह कूड़े-करकट का अंबार है। गंदगी पनप रही है और लोगों के बीमार पडऩे का खतरा भी बढ़ गया है।

कूड़े-करकट से घिरे बेंचों पर बैठ लोग भोजन कर रहे थे

बनप्पा पार्क सड़क पर शनेश्वर स्वामी मंदिर और बीबीएमपी स्वास्थ्य केंद्र की बीच स्थित इस पार्क की हकीकत यही है। बीबीएमपी की लापरवाही के बावजूद पार्क वीरान नहीं हुआ है। आसपास सरकारी कार्यालय, स्कूल-कॉलेज, न्यायालय और अस्पताल हैं। गंदगी के बीच लोग यहां पहुंचते हैं। पत्रिका संवाददाता ने जब इस पार्क का दौरा किया तब दोपहर के भोजन का समय था। कूड़े-करकट से घिरे बेंचों पर बैठ लोग भोजन कर रहे थे। कुछ बच्चे पार्क में क्रिकेट खेल रहे थे। अधिवक्ताओं का एक समूह पार्क के बीचों बीच चर्चा में व्यस्त था। पार्क के एक कोने में दो छात्र पढ़ाई कर रहे थे। आसपास कुछ लोग धूम्रपान में व्यस्त थे। ताश के पत्ते, सिगरेट के खाली पैकेट, प्लास्टिक के ग्लास, एकल यूज प्लास्टिक, गुटखा का पैकेट, माचिस की डिबिया सहित शराब और बीयर की खाली बोतलें जगह-जगह पड़ी थीं। शराब पीने वालों ने कुछ बोतलें तोड़ रखी थीं। नमकीन व अन्य खाद्य सामग्री बिखरी हुई पड़ी थी।

डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियां फैलने का खतरा

 

पार्क की दुर्दशा के लिए बीबीएमपी के साथ-साथ स्थानीय लोग भी उतने ही जिम्मेदार है। हालत से अवगत होने के बावजूद न तो बीबीएमपी के कान में जू रेंग रही है और न ही जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं। कई बार शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। पार्क सार्वजनिक संपत्ति है साफ-सफाई की जिम्मेदारी बीबीएमपी के साथ लोगों की भी है। डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। पार्क आबादी के बीच स्थित है और इसे विकसित करना बेहद जरूरी है।

शराबियों ने बनाया मयखाना

पार्क के एक बेंच पर आराम कर रहे एक बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा कि पार्क में रोजाना असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। शराबियों ने पार्क को मयखाना बना रखा है। इस पार्क की बदहाली की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। जब तक सभी मिलकर काम नहीं करेंगे तब तक पार्क का सौंदर्यीकरण नहीं हो सकता है। पार्क को हरा-भरा करने का एक बार फिर प्रयास किया जाना चाहिए।