
देश के कॉफी उत्पादन में भारी गिरावट की संभावना
बेंगलूरु. मौजूदा वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान देश सहित राज्य में कॉफी उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है क्योंकि राज्य के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्र कोडुगू, चिक्कमगलूरु और हासन जिलों पिछले दिनों आई विनाशकारी बाढ़ के कारण कॉफी की फसल बड़े स्तर पर बर्बाद हुई है। एक अनुमान के मुताबिक देश का 70 प्रतिशत कॉफी उत्पादन इसी क्षेत्र में होता है और बारिश के कारण उत्पादन में भारी गिरावट आने की संभावना है।
कॉफी बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि बारिश और भूस्खलन के कारण कॉफी बागानों को भारी नुकसान पहुंचा है जिससे उत्पादन में गिरावट आने की पूरी संभावना है। पिछले कुछ सप्ताह के दौरान इन जिलों में करीब 40 प्रतिशत तक अधिक बारिश हुई है जिस कारण फसल को नुकसान हुआ है। पिछले वर्ष 2017-18 में राज्य में 3.16 लाख टन कॉफी उत्पादन हुआ था लेकिन इस बार स्थिति भिन्न हो सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि नुकसान वास्तविक आकलन अगले कुछ सप्ताह के बाद पता चलेगा क्योंकि फिलहाल फसल नुकसान का सर्वेक्षण किया जा रहा है। कोडुगू को देश की कॉफी भूमि के रूप में जाना जाता है। हालांकि इस बार हुई विनाशकारी बारिश के कारण करीब 4000 एकड़ भूमि पर कॉफी बागान पूरी तरह से उजड़ गया है। वहीं कोडुगू जिले में अलग अलग किस्म की फसलों को करीब 15000 हेक्टेयर भूमि पर नुकसान पहुंचा है। अनुमानत: क्षेत्र में करीब 82 हजार टन फसल नुकसान हुआ है।
बागान श्रमिकों को रोजगार संकट
कॉफी बागानों के उजडऩे से न सिर्फ कॉफी उत्पादकों की चिंता बढ गई है बल्कि बागान श्रमिकों के समक्ष रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है। आफत की बारिश आने से कॉफी क्षेत्र में कार्यरत श्रमिक चिंतित हैं क्योंकि उनकी आय का एकमात्र स्रोत पर फिलहाल संकट के बादल घिर आए हैं। श्रमिकों में ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर होते हैं, ऐसे में बागानों में काम नहीं रहने के कारण उन्हें अब अपने भविष्य की चिंता सता रही है।
किसानों पर लगातार दूसरे वर्ष पड़ी मार
कोडुगू क्षेत्र में अरेबिका और रोबस्टा किस्म की कॉफी का उत्पादन होता है। पिछले वर्ष रिकॉर्ड स्तर पर कॉफी उत्पादनन होने के कारण कॉफी की कीमत में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट आई थी। वर्ष 2016-17 में जहां कॉफी की कीमत प्रति 50 किग्रा 9000 रुपए थी वहीं पिछले वर्ष 2017-18 में कीमतें 6700 रुपए प्रति 50 किग्रा हो गई। इससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ा था। वहीं मौजूदा वर्ष में भारी बारिश होने से किसानों की पूरी फसल ही बर्बाद होने की स्थिति में है।
Published on:
18 Sept 2018 05:18 pm
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