
बेंगलूरु. सीमंधर स्वामी राजेंद्र सूरी संघ, मामूलपेट के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मास में गुरु राजेंद्र भवन किलारी रोड में विराजित साध्वी भव्यगुणाश्री ने कहा कि जिनवाणी श्रवण करने से आत्मा पवित्र होती है। क्रोध, मान, लोभ, माया आदि खत्म होने से हम यह पहचान कर सकते है कि हमारे लिए क्या अच्छा ओर क्या बुरा है। जीवन जितना मर्यादित होगा उतना ही आनंदित होगा। सुख भोग में नहीं त्याग में ही मिलता है। अज्ञानी व मोहग्रस्त जीव दु:ख पाता है। उनके पीछे वह धर्म को भी छोड़ देता है जबकि धर्म से जुड़े रहने पर ही वास्तविक सुख की प्राप्ति होगी।
साध्वी शीतलगुणा ने कहा कि कोई भी कार्य जब दूसरों की भलाई के लिए होता है तो वह धर्म बन जाता है। इस अवसर पर राजमल गुलेच्छा, गौतमचंद लुणिया, विजयराज बागमार,प्रवीण दक, अरुण जैन सहित अन्य ने दर्शन का लाभ लिया। महापूजन का लाभ मिश्रीमल राणावत परिवार ने लिया। मेघराज भंसाली, मांगीलाल वेदमुथा, नेमिचंद वेदमुथा, अशोक जैन, नरपत मुकेश राणावत उपस्थित रहे। संघ की ओर से स्वागत किया गया।
Published on:
16 Oct 2023 02:55 pm
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