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बाघ को उसकी धारियों से पहचान लेते हैं

मेल कमनाहल्ली क्षेत्र में लगे एक कैमरे ने बाघ की तस्वीर ली है। लेकिन खोजी दल को बाघ नहीं दिखा। बाघ को पकडऩे में सोलिगा आदिवासियों (Soliga Tribe) की भी मदद ली जा रही है। शेर, बाघ और तेंदुआ आदि को जंगलों में खोजने में ये लोग माहिर होते हैं। तेंदुओं और बाघों द्वारा छोड़े गए हर निशान को ये आसानी से भांप जाते हैं। सोलिगा जनजाति बाघ को उसकी धारियों से पहचान लेते हैं।

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बाघ को उसकी धारियों से पहचान लेते हैं

बाघ को उसकी धारियों से पहचान लेते हैं

-बाघ ने हाथी के बच्चे को बनाया शिकार
-चौथे दिन भी हाथ नहीं लगा

बेंगलूरु.

बाघ ने गत चार दिनों से वन विभाग के खोजी दल को छका रखा है। कैमरा ट्रैप (Camera Trap) में कैद तस्वीरों और पग मार्क (Pugmark) के अनुसार वह हुंडीपुरा (Hundipura) क्षेत्र में ही है। चालाकी से चहलकदमी और शिकार कर रहा है। शुक्रवार रात उसने एक हाथी (elephant) के बच्चे का शिकार किया। काफी दूर तक शव को घसीटा भी। शव के अवशेष मिलने वाले क्षेत्र में बाघ के होने की आशंका है।

बंडीपुर टाइगर रिजर्व के निदेशक टी. बालचंद्र ने बताया कि बाघ (Tiger) की तलाश जारी है। वन विभाग ने कोई कसर बाकी नहीं रखी है। कैमरों की संख्या 140 से 200 की गई है। हुंडीपुरा में गत 30 वर्ष से परिवार के साथ रह रहे किसान नारायण ने कहा कि इस क्षेत्र में हाथियों का दिखना आम बात है, लेकिन गत छह माह से नियमित रूप से बाघों का दिखना चिंतित करने वाला है। खेतों में काम करना और मवेशियों को चराना मुश्किल हो गया है।

हालांकि बालचंद्र का कहना है कि लोगों को डरने की नहीं सावधानी बरतने की जरूरत है। वन विभाग किसानों की काउंसलिंग भी कर रहा है। बाघ देखे जाने की स्थिति में वन विभाग को सूचित करने के लिए कहा गया है। उन्होंने फिर दोहराया कि बाघ को मारने की योजना नहीं है। बाघ को तब तक मारा नहीं जा सकता जब तक उसके आदमखोर होने की पुष्टि ना हो जाए। आदमखोर घोषित करने के पहले कई नियमों का पालन करना पड़ता है। नौ सदस्यीय समिति को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है।