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बेंगलूरु. कस्तूरबा रोड पर स्थापित बेंगलूरु का सरकारी संग्रहालय कर्नाटक का सबसे पुराना व दक्षिण भारत का दूसरा सबसे पुराना संग्रहालय है। हाल ही 156 वर्ष पूरा करने वाले इस संग्रहालय की कहानी बेहद रोचक है।
संग्रहालय को 18 अगस्त, 1865 को केंटोनमेंट की एक जेल की इमारत में शुरू किया गया था। इसे शुरू में मैसूर संग्रहालय कहा जाता था। 1877 में, संग्रहालय को वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया था।
स्थापना के साथ ही संग्रहालय बेंगलूरुवासियों के बीच बेहद लोकप्रिय था। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उद्घाटन के पहले वर्ष में लगभग 80,213 आगंतुकों ने संग्रहालय की वस्तुओं का अवलोकन किया था। यह भी एक दिलचस्प बात है कि उस समय यहां आने वाले अधिकांश लोग अशिक्षित थे और हस्ताक्षर करने में भी सक्षम नहीं थे।
इसके उद्घाटन का एक दिलचस्प इतिहास है। मद्रास सेना में चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्यरत डॉ ई बालफोर ने मद्रास में एक संग्रहालय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में, जब उन्हें बेंगलूरु स्थानांतरित कर दिया गया तो उन्होंने बेंगलूरु में भी संग्रहालय स्थापित करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई।
दान के 3203 वस्तुओं से संग्रहालय शुरू
डॉ बालफोर और उनकी टीम ने 1863 के बाद से कलाकृतियों का संग्रह करना शुरू किया। उस समय के अमीर व उदारमना लोगों ने संग्रहालय के लिए नायाब वस्तुएं दान कीं। आखिरकार दान के 3203 वस्तुओं से संग्रहालय शुरू हुआ। उद्घाटन के समय पुराने सिक्के, सिल्क, कॉटन आदि संंग्रहालय की शोभा बने। प्रारंभिक वर्षों के दौरान संग्रहालय सुबह 6.30 बजे से शाम 6 बजे तक जनता के लिए खुला रहता था।
शुरू में प्रवेश नि:शुल्क था
इस सडक़ को शुरू में म्यूजियम रोड कहा जाता था जिसे बाद में कस्तूरबा रोड का नाम दिया गया। संग्रहालय में शुरू में प्रवेश नि: शुल्क था। बाद में वर्ष 1965 से प्रवेश के टिकट तय किया गया। उस समय टिकट की कीमत वयस्कों के लिए 10 पैसे और बच्चों के लिए पांच पैसे थी। वर्तमान में संग्रहालय वयस्कों के लिए 20 रुपए और बच्चों के लिए 10 रुपए का शुल्क लिया जाता है।
Published on:
23 Aug 2021 04:54 pm
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