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चिडिय़ाघरों को चाहिए नर नहीं मादा जेब्रा

कुलकर्णी ने बताया कि परस्पर संघर्ष नहीं हो इसके लिए नर की तुलना में मादा जेब्रा चिडिय़ाघरों की पहली पसंद है।

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बेंगलूरु. मैसूरु चिडिय़ाघर, बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क (बीएनपी) और चित्रदुर्गा स्थित अदुमल्लेश्वर चिडिय़ाघर जेब्रा लाने की तैयारी में है। मैसूरु चिडिय़ाघर के मुख्य कार्यकारी निदेशक अजीत कुलकर्णी ने बताया कि सात मादा और एक नर जेब्रा विदेश के उन चिडिय़ाघरों से लाने की योजना है, जहां इनकी आबादी ज्यादा है। ऐसे चिडिय़ाघर तलाशने की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी जाएगी।

आवश्यक अनुमति से लेकर जेब्रा को चिडिय़ाघर लाने की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। इसके अलावा कंपनी जेब्रा भेजने और पाने वाले चिडिय़ाघर के बीच समन्वय करके उनकी देखभाल के संबंध में कर्मचारियों को प्रशिक्षण देगी। कुलकर्णी ने बताया कि परस्पर संघर्ष नहीं हो इसके लिए नर की तुलना में मादा जेब्रा चिडिय़ाघरों की पहली पसंद है। मैसूरु चिडिय़ाघर में पहले से ही तीन नर और तीन मादा जेब्रा हैं। दो और जेब्रा आने से इनकी संख्या आठ होगी।

अदुमल्लेश्वर चिडिय़ाघर को एक नर और दो मादा जेब्रा दिए जाएंगे। जबकि बीएनपी ने तीन मादा जेब्रा की मांग की है। बीएनपी में पहले से ही एक मादा और तीन नर जेब्रा हैं। बीएनपी में पहले जेब्रा का एक जोड़ा था, इनसे दो नर जेब्रा हुए। जो बाद में आपस में संघर्ष करने लगे।
अदुमल्लेश्वर चिडिय़ाघर के लिए ये सुनहरा मौका होगा, क्योंकि यहां जेब्रा नहीं है। हाल ही में नील गाय और चित्तीदार हिरण के पहुंचने से पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। जेब्रा आने से इनकी संख्या बढऩे की उम्मीद है।