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इस राज्य ने खोए 64 वर्ग किमी मध्यम घने जंगल

- 155 वर्ग किमी वन क्षेत्र बढ़ा पर पर्याप्त नहीं- कुल वन आवरण भौगोलिक क्षेत्र का केवल 20 फीसदी, राष्ट्रीय औसत 21.7 फीसदी

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इस राज्य ने खोए 64 वर्ग किमी मध्यम घने जंगल

इस राज्य ने खोए 64 वर्ग किमी मध्यम घने जंगल

बीते दो वर्षों में कर्नाटक ने 155 वर्ग किमी वन क्षेत्र जोड़े हैं। लेकिन, वर्ष 2019 की तुलना में यह काफी कम है। इसी अवधि में राज्य ने 64 वर्ग किमी मध्यम घने जंगल खोए हैं।

भारत वन राज्य रिपोर्ट (आइएसएफआर) 2021 के अनुसार वर्ष 2019 की तुलना में कर्नाटक ने 64 वर्ग किमी मध्यम घने जंगल (मॉडरेट फॉरेस्ट) खोए हैं। मॉडरेट फॉरेस्ट एक प्रकार है, जो राज्य में कुल वन क्षेत्र का 54 फीसदी है।

पिछले अध्ययन के अनुसार राज्य में 1000 वर्ग किमी वन क्षेत्र बढ़ा लेकिन, अगले दो वर्षों में यह बढ़ोतरी केवल 155 वर्ग किमी ही रह गई। बावजूद इसके कुल वन आवरण भौगोलिक क्षेत्र का महज 20.2 फीसदी है जबकि राष्ट्रीय औसत 21.7 फीसदी है। वैश्विक मानदंडों के अनुसार वन क्षेत्र भौगोलिक क्षेत्र का न्यूनतम 33 फीसदी होना चाहिए। 155 वर्ग किमी वन क्षेत्र की वृद्धि के कारण कर्नाटक देश के पांच शीर्ष राज्यों में चौथे पायदान पर है।

पिछले सर्वेक्षण अवधि के दौरान 38,575 वर्ग किमी की तुलना में कर्नाटक का कुल वन क्षेत्र 38,730 वर्ग किमी है। यानी बीते दो वर्षों में 0.4 फीसदी की ही वृद्धि हुई है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार संरक्षण उपाय, सुरक्षा, वनीकरण गतिविधियां, वृक्षारोपण अभियान और कृषि वानिकी वन अवरण बढ़ाने में मददगार साबित हुई हैं। लेकिन, अब भी काफी कुछ किया जा सकता है।

कर्नाटक में 38,730 वर्ग किमी के वन क्षेत्र में बहुत घने जंगल और खुले वन क्षेत्र में वृद्धि हुई है जबकि मध्यम रूप से घने वन क्षेत्र में कमी आई है। 446 वर्ग किमी वन क्षेत्र वन क्षेत्र के बाहर है। इसका मतलब यह है कि दर्ज वन क्षेत्र के भीतर वन क्षेत्र केवल 38,284 वर्ग किमी है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 20 फीसदी ही है। स्थानांतरित खेती, पेड़ों की कटाई, प्राकृतिक आपदाएं, मानवजनित (मानव) दबाव और विकासात्मक गतिविधियां वन आवरण में कमी के जिम्मेदार हैं।

वन्यजीव कार्यकर्ता जोसेफ हूवर के अनुसार आग लगने के कारण भी हर वर्ष हरे आवरण का नुकसान होता है। उदाहरण के लिए इस वर्ष 15 फरवरी से दो मार्च तक राज्य के जंगलों में आग की 2042 घटनाएं हुईं। इनमें से 627 घटनाएं बड़ी थीं।

कृषि-वानिकी क्षेत्रों से नुकसान की भरपाई!
एक पूर्व वन अधिकारी के अनुसार Karnataka सरकार वन आवरण बढऩे का दावा करती है। सच्चाई यह है कि अधिसूचित वन क्षेत्र का दायरा काफी कम हुआ है। कई कृषि-वानिकी क्षेत्रों को वन क्षेत्रों के रूप में पेश कर नुकसान की भरपाई होती है। वर्ष 2016-17 तक कर्नाटक ने 9907 हेक्टेयर वन क्षेत्र खोया था।

746 हेक्टेयर वन क्षेत्र का नुकसान
वन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि खनन और विकास परियोजनाओं के कारण भी वन क्षेत्र का नुकसान हो रहा है। पिछले तीन वर्षों में राज्य ने 746 हेक्टेयर वन क्षेत्र खोए। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बल्लारी और उत्तर कन्नड़ जिला सर्वाधिक प्रभावित है। दोनों जिले अपने भौगोलिक क्षेत्र और वन के प्रकार के मामले में अद्वितीय और विशिष्ट हैं। सरकार ने कई वन क्षेत्रों में या इसके आसपास विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं को मंजूरी दी है।