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यह संसार एक परीक्षा भवन-साध्वी डॉ.हेमप्रभा

धर्मसभा का आयोजन

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यह संसार एक परीक्षा भवन-साध्वी डॉ.हेमप्रभा

यह संसार एक परीक्षा भवन-साध्वी डॉ.हेमप्रभा

बेंगलूरु. जय ब्रज मधुकर अर्चना चातुर्मास समिति के तत्वावधान में साध्वी डॉ. सुप्रभा के सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में साध्वी डॉ. हेमप्रभा ने कहा कि जन्म और मृत्यु के तीन अवस्थाएं हैं। जहां प्रथम लर्निंग दूसरा अर्निंग, और तीसरा टर्निंग। इन अंग्रेजी के 3 शब्दों के माध्यम से मानव जीवन की तीन अवस्थाओं को परिभाषित करते हुए कहा कि प्रथम लर्निंग यानी कि आपका बचपन, जहां पर बाल्यावस्था में ज्ञानार्जन का कार्य संपादित होता है। दूसरा अर्निग अर्थात युवावस्था में व्यापार व्यवसाय कमाई करना और धन इक_ा करना। तीसरा टर्निंग यानी कि जीवन का आखिरी मोड़, वृद्धावस्था को प्राप्त करना। बुढ़ापे में शारीरिक, मानसिक, वैचारिक परिवर्तन यह टर्निंग प्वाइंट का है। उन्होंने कहा कि यह संसार भी एक परीक्षा भवन है। जहां पर आपको बचपन, जवानी और बुढ़ापे के रूप में 3 घंटे मिलते हैं। साध्वी डॉ. उदितप्रभा ने प्रारंभ में अंतगड़ दशा सूत्र का सरल सुबोध शैली में विस्तार से वाचन एवं विवेचन प्रस्तुत करते हुए कहा कि महापुरुषों का जीवन दुख भंजक होता है। उन्होंने सूत्र के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन के एक घटना प्रसंग को प्रस्तुत करते हुए कहा कि किस तरह श्रीकृष्ण के एक वृद्ध की मार्ग में एक ईट उठाकर उसके घर की तरफ रख देने से मार्ग में साथ में चल रहे सभी साथ वालों ने भी सैनिकों ने भी एक-एक करके सभी ईट उठाकर दूसरी तरफ रख देने से उस वृद्ध व्यक्ति की बहुत मदद हुई। इस प्रकार महापुरुष जो कार्य करते हैं उनके आचरण से लोग प्रभावित होकर प्रेरणा लेते हैं। साध्वी डॉ.सुप्रभा ने कहा कि पर से हटना और स्व में आना ही प्रतिक्रमण की साधना का सार है। प्रतिक्रमण यह आत्मा की औषधि है। जो हमारी आत्मा पर लगे अनादि काल से कर्म मेल रूपी धब्बों को साफ करने में एक औषध का काम करता है। उन्होंने कहा कि वंदना करने से साधक के नीच गोत्र का क्षय होता है। वर उच्च गोत्र का प्राप्ति होता है। प्रवचन के पश्चात जय ब्रज मधुकर अर्चना चातुर्मास समिति के तत्वावधान में यहां विराजित साध्वीवृंद की निश्रा में गुरु मधुकर मिश्री एवं राजगुरु माता उमरावकुंवर के संयम काल के स्वर्णिम इतिहास की कहानी बयां करती चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। गैलरी का उद्घाटन चेतनप्रकाश डूंगरवाल ने किया। इस अवसर पर चातुर्मास समिति के चेयरमैन श्रेणिकराज चोरडिय़ा, अध्यक्ष पुखराज बोथरा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रकाशचंद बेताला, संयोजक शांतिलाल भंडारी, धर्मेंद्र मरलेचा, महामंत्री मनोहरलाल लुकड़, मंत्री पदम बोहरा, पुष्प चोरडिय़ा, आनंदकुमार चोरडिय़ा, कोषाध्यक्ष गुलाबचंद पगारिया, सह कोषाध्यक्ष रमेशचंद्र सिसोदिया, सुर्दशन मांडोत, किशोर गादिया, शांति लूणावत, उत्तम मूथा, महिला समिति के चेयरमैन संतोष बोहरा, महामंत्री इन्दिरा चेलावत, लीलाबाई बोथरा, युवा समिति के अध्यक्ष महावीर चोरडिय़ा उपस्थित थे।