
बेंगलूरु. आंखों के उपचार के लिए प्रदेश के सबसे बड़े मिंटो आई सरकारी अस्पताल (Minto Eye Hospital remains shut due to covid, thousands of patients in the danger of losing eye sight) पर आश्रित गरीब मरीजों के साथ राष्ट्रीय अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम को भी धक्का लगा है। कोविड महामारी के दौरान जून में ओपीड खुली लेकिन ऑपरेशन थिएटर बंद पड़े हैं। आंखों की सर्जरी के मरीजों की कतार हर दिन के साथ लंबी होती जा रही है।
कोविड महामारी के बाद से ही अस्पताल आम मरीजों के लिए बंद है। 300 बिस्तर वाले इस अस्पताल के 100 बिस्तर कोविड मरीजों के उपचार के लिए आरिक्षत किए गए हैं। लेकिन अब तक एक भी कोविड मरीज का यहां उपचार नहीं हुआ है। महामारी से पहले रोज 300-350 मरीज अस्पताल आते थे। इनमें से 50-60 मरीजों को सर्जरी होती थी। कैटरैक्ट के कारण ज्यादा मरीजों को सर्जरी की जरूरत पड़ती है। जून में ओपीडी खुलने के बाद से प्रतिदिन 100 से ज्यादा मरीज अस्पताल आ रहे हैं। मरीजों की मदद के लिए अस्पताल प्रशासन मोबाइल क्लिनिक चला रहा है। लेकिन ऑपरेशन वाले मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है।
मिंटो अस्पताल की निदेशक डॉ. सुजाता राठौड़ ने बताया कि उन्होंने सरकार को पत्र लिख अस्पताल और ऑपरेशन थिएटर शुरू करने की इजाजत मांगी है। अगले कोविड बैठक में सुनवाई की संभावना है। उपचार जल्द प्रारंभ होने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय ऑप्थालमिक एसोसिएशन (एनओए) के अनुसार उपचार जल्द शुरू नहीं होने पर हजारों लोग आंखों की रोशनी खो सकते हैं। एनओए के अध्यक्ष डॉ. एम. वेंकेटेश ने कहा कि राष्ट्रीय अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम जल्द प्रारंभ होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पत्र भेजा है। कैटरैक्ट सर्जरी, लेजर सर्जरी और कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए मरीज इंतजार में हैं। समय पर उपचार और सर्जरी के अभाव में 15 हजार से ज्यादा मरीज हमेशा के लिए आंखों की रोशनी खो सकते हैं।
Published on:
17 Sept 2020 08:40 pm
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