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तीन हजार साल से भारत में सहिष्णुता : दलाई लामा

असहिष्णुता की कथित बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि भारत के लिए यह बेहतर होगा कि वह धर्म निरपेक्षता की भावना

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Shankar Sharma

Dec 06, 2015

Dalai Lama

Dalai Lama

बेंगलूरु.
असहिष्णुता की कथित बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि भारत के लिए यह बेहतर होगा कि वह धर्म निरपेक्षता की भावना पर विश्वास रखते हुए आगे बढ़े क्योंकि देश का संविधान इसी मूल भावना पर टिका हुआ है।


यहां रविवार को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि विश्व के किसी भी अन्य देश की तुलना में भारत में धार्मिक सहिष्णुता सबसे अधिक है। स्वतंत्रता के बाद इस देश के विद्वान जनों ने धर्म निरपेक्षता को मूल में रखकर संविधान का मसौदा तैयार किया। भारत के लिए यह नया नहीं है। भारत तीन हजार साल से अहिंसा और सहिष्णुता का उपदेश देता रहा है और अपने देश की जनता से समाज में शांति और सौहाद्र्र के साथ रहने को कहता है। पिछले कई शताब्दियों से भारत में लोग धार्मिक सद्भाव के साथ रहते आ रहे हैं। धर्म निरपेक्षता का अर्थ दूसरे धर्मों का अनादर हरगिज नहीं हो सकता। ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता।

धार्मिक सौहाद्र्र का अनूठा उदाहरण भारत
दलाई लामा ने कहा 'भारत धार्मिक सौहाद्र्र का अनूठा उदाहरण है और यह पश्चिमी सोच के बिल्कुल विपरीत है।


मैं पश्चिम में धार्मिक आधार पर धर्मनिरपेक्षता के प्रति अनादर जैसे भाव देख रहा हूं। यह सोच सही नहीं है। मुस्लिम समुदाय में कुछ तत्व अलग सोच रखते हैं अन्यथा वे शांति प्रिय हैं। भारतीय मुस्लिम समुदाय इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण है। उन्होंने कहा कि विश्व भर में अतिवाद से उपजी गंभीर समस्या का समाधान बेहतर शिक्षा में छिपा हुआ है। शिक्षा के माध्यम से इस गंभीर समस्या का उन्मूलन कर सकते हैं। शिक्षा लोगों में अच्छी समझ पैदा कर सकती है। विश्व को सशक्त शैक्षणिक पद्धतियों पर गौर करना होगा जो युवाओं को धर्म निरपेक्षता की नीति पर चलने को सिखाए। उन्होंने कहा कि पेेरिस में हुआ आतंककारी हमला फ्रांस की जनता के लिए बड़ा झटका है लेकिन, यूरोप की बहु-धार्मिक आबादी के बीच एक मजबूत इच्छा होनी चाहिए। इसमें बड़ों को छोटे और युवाओं को शांतिपूर्वक रहने का संदेश देना चाहिए।

स्थानीय लोगों का विकास भी जरूरी : पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि कहा कि स्थानीय लोगों का विकास उतना ही जरूरी है जितना वैश्विक अर्थव्यवस्था का। विकास गांवों में होना चाहिए न कि बड़े शहरों में। ग्रामीण इलाकों में सड़कों, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा और जीवन स्तर का विकास होना चाहिए। शहरों में विकास देखते हैं मगर क्या हमने खुद को गंदा नहीं किया है? उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर भी जोर दिया और कहा कि इंदिरा गांधी और मार्गरेट थैचर जैसी महिलाओं को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर उभरना जरूरी है।

अगला दलाई लामा कोई महिला बनें : उन्होंने कहा 'मेरा दृढ़ विश्वास है कि मुस्लिम समुदाय महिलाओं को और अधिक आजादी दे ताकि वे नेतृत्व कर सकें। मैं चाहता हूं कि मेरे मरने से पहले अगला दलाई लामा कोई महिला बने। सामाजिक जीवन में महिलाओं को सशक्त करना होगा। महिलाएं सामाज में शांति ला सकती है जो कई बार साबित हो चुका है।