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जिस कॉलेज में की पढ़ाई, उसी कॉलेज में पढ़ा रहीं ट्रांसवुमन रेणुका

इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था। उन्हें अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

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एक ट्रांसवुमन Transwoman अब उसी कॉलेज में पढ़ा रही हैं, जहां से उन्होंने खुद पढ़ाई की है। उनके लिए कई मायनों में यह एक गौरव का क्षण है। उन्हें यह अवसर दिया है श्री कृष्णदेवराय बल्लारी विश्वविद्यालय Sri Krishnadevaraya Ballari University ने।

इस विश्वविद्यालय ने मिसाल पेश करते हुए राज्य में पहली बार किसी ट्रांसवुमन को अतिथि व्याख्याता के रूप में नियुक्त Transwoman appointed as guest lecturer किया है। 35 वर्षीय रेणुका पोजारी (35) ने इसी विवि से कन्नड़ विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। बल्लारी जिले के कुरुगोडु की निवासी Renuka Pojari के लिए इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था। उन्हें अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। विपरीत परिस्थियों में भी खुद को संभाले रखा। स्नातकोत्तर के बाद वे कन्नड़ विषय में पीएचडी करना चाहती थीं, लेकिन नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के कारण वे अपने सपने से दूर रह गईं।

रेणुका ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलपति और विशेषकर कुलसचिव प्रो. एस. एन. रुद्रेश सहित अन्य अधिकारियों ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कॉलेज में नामांकन के समय समर्थन किया था। वे अब कर्नाटक राज्य पात्रता परीक्षा या राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होकर किसी सरकारी कॉलेज में प्रोफेसर बनना चाहती हैं। वे पीएचडी भी करना चाहती हैं।

प्रो. रुद्रेश ने बताया कि रेणुका पिछले साल पीएचडी स्कॉलर के तौर पर अपना नामांकन कराने कार्यालय आई थी। लेकिन, वह नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के कारण नामांकन नहीं करा सकी। जब उसने पढ़ाने में अपनी रुचि दिखाई, तो उन्होंने विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्यों से इस बारे में चर्चा की। उसे डेमो के लिए बुलाया गया और सभी उसके शिक्षण कौशल से खुश थे। सिंडिकेट ने उसे अतिथि संकाय के रूप में नियुक्त करने के लिए अपनी स्वीकृति दी।

रेणुका ने कहा, ट्रांसजेंडर समुदाय Transgender Community के लोगों का मानना है कि भीख मांगना ही उनके लिए आजीविका का एकमात्र विकल्प है। लेकिन, जिन्होंने डिग्री कोर्स पूरा कर लिया है, वे नौकरी कर रहे हैं और कुछ हाईस्कूल शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए हैं। वे चाहती हैं कि ट्रांसजेंडर समुदाय शिक्षा की ताकत को पहचाने और भीख मांगना बंद करे। अगर हम अच्छे काम करना शुरू कर दें तो समाज निश्चित रूप से साथ देगा।