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सत्य मनुष्य को जीने की कला सिखाता है-आचार्य देवेंद्रसागर

धर्मसभा का आयोजन

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सत्य मनुष्य को जीने की कला सिखाता है-आचार्य देवेंद्रसागर

सत्य मनुष्य को जीने की कला सिखाता है-आचार्य देवेंद्रसागर

बेंगलूरु. जयनगर के राजस्थान जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ में आयोजित धर्मसभा में आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने कहा कि सत्य के मार्ग पर चलकर ही जीवन का कल्याण हो सकता है। सत्य ही जीवन का आधार है। उन्होंने कहा सत्य शब्द सुनने देखने में छोटा लगता है, लेकिन जब व्यक्ति इसका अनुसरण करता है तो वह परम पद तक पहुंच जाता है। सत्य हमें प्रकाश की ओर ले जाता है और प्रमाद से बचाता है। भगवान महावीर ने कहा है कि हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील एवं परिग्रह के भाव को त्याग देना ही सत्य है। उन्होंने कहा सत्य मनुष्य को जीने की कला सिखाता है, सत्य ही जीवन का आधार है। असत्य के आधार पर टिका जीवन स्थायी नहीं हो सकता। मनुष्य अपने स्वार्थ के कारण अनेक प्रकार के झूठ बोलता है। जिससे उसका जीवन कष्ट पूर्ण व्यतीत होता है। सत्य के मार्ग पर चलकर ही मनुष्य का कल्याण हो सकता है। सत्य मांगने से नहीं साधना से मिलता है। सच अथवा सत्य बोली का सबसे सुंदर स्वरूप है। जो व्यक्ति जीवन में सत्यता के गुण को अपनाते है उनमें बड़े मौलिक बदलाव नजर आते हैं। प्रत्येक युग में सत्य हमेशा विजयी हुआ है तथा समाज ने उसे अपना दैवीय आदर्श माना हैं। मानव जीवन के लिए सत्य एक अटूट अंग हैं। यदि किसी समाज या देश के सभी लोग सत्य को अपने जीवन का मूल आधार बनाए तो निश्चय ही उस देश को प्रगति के शिखर पर पहुच जाता हैं। क्योंकि देश तथा समाज की अधिकतर समस्याओं की मूल जड़ असत्य ही हैं। सत्य की बोली का दिल से गहरा सम्बन्ध होता हैं। हमारे सामने वाला व्यक्ति सत्य बोल रहा है या नहीं इसकी गवाही उसकी शारीरिक हालचाल ही बता देती हैं. क्योंकि व्यक्ति के वचन के साथ ही उनके अंग एक विशिष्ट प्रतिक्रिया देते हैं। एक आम व्यक्ति के जीवन में सत्य का बड़ा महत्व हैं यह हमें धन दौलत, ईमान, विश्वास तथा सम्मान भी दिलाता है।