
दक्षिण में अलग महागठबंधन बनाने की कोशिश
बेंगलूरु. आगामी लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से मुकाबले के लिए दक्षिणी राज्यों में एक अलग महागठबंधन बन रहा है जिसकी अगुवाई सत्तारूढ़ गठबंधन दल का एक घटक जनता दल-एस कर रहा है।
केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी को छोड़कर दक्षिण के बाकी सभी चार राज्यों में क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने की कोशिश हो रही है। इन चार राज्यों में लोकसभा की 106 सीटें हैं जबकि पुदुचेरी में एक और केरल में 20 सीटें हैं।
दक्षिण में कर्नाटक को छोड़कर बाकी राज्यों में भाजपा ज्यादा मजबूत स्थिति में नहीं है। हालांकि, पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा का खाता तमिलनाडुु में पहली बार खुला था।
इस महागठबंधन में जद-एस और कांग्रेस के अलावा आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी), तेलंगाना में अभिनेता पवन कल्याण की पार्टी जनसेना और तमिलनाडु में मशहूर अभिनेता कमल हासन की पार्टी मक्कल निदि मय्यम और डीएमके शामिल होंगे।
राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी इन तमाम दलों को साथ लाने और एक महागठबंधन के गठन की मध्यस्थता कर रहे हैं। दक्षिण में भाजपा के विस्तार को रोकने कोशिश के लिए बन रहे इस महागठबंधन की अगुवाई संभवत: इसकी अगुवाई पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा करेंगे।
कुमारस्वामी इसके लिए कमल हासन और पवन कल्याण से पहले ही बातचीत कर चुके हैं। अब इस बात की भी संभावना है कि दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में सभी पार्टियों के नेताओं के साथ बैठक होगी जिसमें इस मुद्दे पर औपचारिक रूप से चर्चा होगी।
योजना के मुताबिक आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में कांग्रेस, टीडीपी और जनसेना साथ चुनाव लड़ेगी वहीं तमिलनाडु में डीएमके, कांग्रेस और मक्कल निदि मय्यम साथ चुनाव लड़ेंगे।
कर्नाटक में कांग्रेस और जद-एस गठबंधन पहले से ही है और ये दोनों दल लोकसभा चुनाव भी साथ में लड़ेंगे। फिल्मी दुनिया से जुड़े कमल हासन और पवन कल्याण कर्नाटक में भी महागठबंधन के लिए चुनाव प्रचार करेंगे।
इस बीच मशहूर अभिनेता चिरंजीवी और बालकृष्णा से भी कर्नाटक में महागठबंधन के लिए चुनाव प्रचार की बातचीत चल रही है। चिरंजीवी को कांग्रेस और बालकृष्णा को टीडीपी चुनाव अभियान में लाने का प्रयास कर रही है।
नेताओं को भरोसा है कि तेलुगू फिल्म स्टार कोलार, चिकबल्लापुर, बेंगलूरु मध्य और उत्तर लोकसभा क्षेत्रों के अलावा बल्लारी, रायचूर, बीदर, गुलबर्गा और यादगीर में अच्छा प्रभाव पैदा करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक हाल ही में देवेगौड़ा और कुमारस्वामी से मिलने आए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इस मुद्दे पर दोनों नेताओं से विचार-विमर्श किया। चर्चा के बाद डीएमके के नेता एमके स्टालिन और नायडू महागठबंधन का हिस्सा होने के लिए तैयार हो गए।
बताया जाता है कि एचडी देवेगौड़ा तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस नेता चंद्रशेखर राव को भी साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं। देवेगौड़ा इसके लिए अपने प्रभाव का पूरा इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बार दोनों नेताओं की भेंट भी हो चुकी है।
हालांकि, यह कहा जा रहा है कि कुछ पार्टियां राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर स्वीकार नहीं कर रही हैं। गठबंधन को हाल में हुए लोकसभा और विधानसभा की पांच सीटों के उपचुनावों में से चार पर सफलता मिली थी।
उधर, सोनिया गांधी और राहुल गांधी राज्य में हाल में हुए उपचुनावों में तीन में से दो लोकसभा सीटों पर गठबंधन उम्मीदवारों के जीतने से काफी खुश हैं।
कांग्रेस ने बल्लारी सीट भाजपा से छीन ली। उन्हें इस बात की भी खुशी है कि शिवमोग्गा लोकसभा क्षेत्र में गठबंधन उम्मीदवार का मत प्रतिशत काफी बढ़ा है।
इसलिए कांग्रेस आलाकमान को लगता है कि अगर दोनों पार्टियां राज्य में साथ मिलकर चुनाव लड़ती हैं, तो 28 में से 20 सीटों पर चुनाव जीतना मुश्किल नहीं होगा।
अभी तक दोनों पार्टियों में जो बातचीत हुई है उसके अनुसार कांग्रेस 18 और जद-एस 10 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।
कहा जा रहा है कि जद-एस अन्य सीटों के अलावा हासन, मंड्या, तुमकूरु, चिकबल्लापुर, मैसूरु, शिवमोग्गा, उत्तर कन्नड़, बेंगलूरु उत्तर पर अपना दावा कर रही है। हालांकि, अभी दोनों अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं।
Published on:
19 Nov 2018 06:57 pm
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