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गुरु अंबेश के दो रतन, ‘एक सौभाग्य एक मदन’

स्मृति दिवस पर बोलीं साध्वी डॉ. सुप्रिया

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गुरु अंबेश के दो रतन, ‘एक सौभाग्य एक मदन’

गुरु अंबेश के दो रतन, ‘एक सौभाग्य एक मदन’

बेंगलूरु. राजाजीनगर जैन स्थानक में विराजित साध्वी सुमित्रा के सान्निध्य में श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्यमुनि के स्मृति दिवस पर साध्वी डॉ. सुप्रिया ने कहा कि हमारे श्रमण संघ का सौभाग्य रहा जो जिनशासन को गुरु सौभाग्य का सान्निध्य मिला। गुरु अम्बेश मेवाड़ संघ शिरोमणि अम्बालाल को मेवाड़ की सेवा का जो अवसर मिला उसका उन्होंने सदुपयोग किया एवं जन-जन की आस्था के केंद्र बन गए। गुरु अंबेश के दो रतन, ‘एक सौभाग्य एक मदन’ ये वाक्य मेवाड़ के हर श्रावक की ज़ुबान पर रहता है। इन दो शिष्यों ने गुरु अंबेश को मानो जन मानस के पटल पर अमर कर दिया। गुरु अम्बेश के विनयवान शिष्य गुरु सौभाग्य, जिनका आदेश 300 गांवों के लिए शिरोधार्य था। आपकी प्रेरणा से मुंबई में मेवाड़ भवन सहित अनेक भवनों का निर्माण हुआ। मुंबई के भक्तों के अंदर आपके प्रति अनन्य सेवा भाव एवं अटूट श्रद्धा है। सौभाग्यमुनिमेवाड़ के दिलों पर राज करते थे। श्रमण संघ को सुदृढ़ एवं मज़बूत बनाने में आपका विशेष सहयोग रहा है। गुरु अम्बेश के नाम स्मरण मात्र से सर्व कार्य सिद्ध होते हैं। आचार्य शिव मुनि के प्रति समर्पण की मिसाल उन्होंने कायम की। इंदौर में आयोजित श्रमण संघीय साधु सम्मेलन में आचार्य एवं श्रमण संघ के भविष्य के निर्माण के लिए उन्होंने वर्तमान युवाचार्य महेंद्र ऋषि के चयन के लिए अपने दृढ़ इच्छा शक्ति का परिचय देकर मंच से हुंकार भरी।
गुरु सौभाग्य ने मिथ्यात्व को समाप्त कर समयकत्व के प्रकाश से जिनशासन के आलोक को प्रजल्लवित किया। आज भले ही वे देह के रूप में हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनका आशीर्वाद सदैव हमारे संघ पर रहेगा।
इसके पूर्व में सात दिवसीय पुच्छिसुणं वीर स्तुति का जप अनुष्ठान साध्वी सुविधि ने किया। साध्वी डॉ. सुप्रिया ने पुच्छिसुणं वीर स्तुति का विवेचन करते हुए कहा कि परमात्मा महावीर की स्तुति होने से इसे वीर स्तुति कहा जाता है। इस गाथा का प्रथम शब्द पुच्छिसुणं होने से इसका नाम पुच्छिसुणं रखा गया है। इस स्तुति में गणधर सुधर्मा स्वामी ने प्रभु के गुणों का बखान किया है। उसने परमात्मा के पुण्यों के गुणों का नहीं बल्कि आत्मिक गुणों का बखान किया गया है। इसीलिए इसका महत्व अधिक है। इस स्तुति का श्रद्धापूर्वक हमें श्रवण करना चाहिए। पुच्छिसुणं वीर स्तुति का वांचन एवं विवेचन 5 अक्टूबर तक सुबह 8.45 से 9.45 तक रहेगा।
नेमीचंद दलाल ने बताया कि इस अवसर पर राजाजीनगर संघ के पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों ने जयमल जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष रेवतमल नाहर, उपाध्यक्ष महेंद्र मेहता एवं रोशनलाल नाहर का अभिनंदन शॉल माल्यार्पण से किया।