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दो साल पहले हासन से लापता वृद्धा असम में सीमा पर मिली

यह घटना किसी फिल्म की कहानी से कम नही है। दो साल पहले हासन जिले से लापता एक वृद्धा का असम की सीमा पर पता चला और जवानों की सहायता से वह अपने परिवार से फिर मिल गई है।

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दो साल पहले हासन से लापता वृद्धा असम में सीमा पर मिली

दो साल पहले हासन से लापता वृद्धा असम में सीमा पर मिली

बेंगलूरु. यह घटना किसी फिल्म की कहानी से कम नही है। दो साल पहले हासन जिले से लापता एक वृद्धा का असम की सीमा पर पता चला और जवानों की सहायता से वह अपने परिवार से फिर मिल गई है। हासन जिले मादिगानाहल्ली निवासी जयम्मा (६५) दो साल पहले सब्जी लाने के लिए घर से मार्केट जाने को निकली थी लेकिन वापस नहीं आई। उसे हर जगह तलाश किया गया और उसका पता नहीं चला। इस सिलसिले में पुलिस थानों में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। गत सप्ताह १८, अक्टूबर को असम के करीम गंज के सुतारकांडी स्थित सीमा पर एक वृद्धा अपने आप में कन्नड़ में बातें कर रही थी।


सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों को वृद्धा की भाषा समझ में नही आई। उन्हें केवल इतना पता चला कि वह दक्षिण भारत की भाषा बोल रही है। जवानों ने कर्नाटक से सबंध रखने वाले जवान ताहिर जबीउल्ला को इस वृद्धा के पास ले गए। ताहिर ने वृद्धा से कन्नड़ में बातें कीं। वृद्धा ने हासन जिले मादिगानाहल्ली के लक्ष्मेश गौड़ा की पत्ना जयम्मा के तौर पर अपनी पहचान कराई। बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने ताहिर को वृद्धा से बातें कर विडियो क्लिप सोशल मीडिया पर डाल दिया।

बीएसएफ के कमान्डर ने हासन जिले की पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने मादिगानाहल्ली ग्राम पंचायत के सदस्य संतोष की जयम्मा से ऑनलाईन विडियो पर मुलाकात कराई। संतोष को पता चला कि यह वृद्धा जयम्मा है। उसने यह सूचना जयम्मा की पुत्री सुनंदा को दी। बीएसएफ अधिकारियों ने फिर जयम्मा और सुनंदा की मुलाकात ऑनलाइन विडियो पर कराई।


सुनंदा ने बताया कि वृद्धा उसकी मां है, जो २८ दिसंबर २०१६ को सब्जी लाने मार्केट के लिए घर से निकली थी लेकिन फिर वापस नहीं आई। उसकी मां ने १२० ग्राम के आभूषण पहने थे। लुटेरों ने आभूषण लूटने के बाद उसे अगरताला जाने वाली रेल गाड़ी हमसफर में बैठास दिया था।


उसकी माँ भीख मांगते हुए असम की सीमा पर पहुंच गई थी। यह खुशी की बात है कि उसकी मां मिल गई। आठ माह पहले उसके पिता का स्वर्गवास हो गया। सुनंदा अपनी एक सहेली सानिया के साथ असम जाकर मां को ले आई है।


जयम्मा का उपचार चल रहा है। वह परिवार के सभी सदस्यों को पहचानने लगी है। सुनंदा ने बताया कि ताहिर, अन्य जवानोंं और बीएसएफ के पुलिस महानिरीक्षक के.पी.गर्ग के कारण उसकी मां मिली है। वे हमेशा सभी जवानों और अधिकारियों की आभारी रहेगी।