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वचन संपदा का सदुपयोग करें, दुरुपयोग नहीं

इस वाणी को चिंतामणि बनाएं, कोयले की खान नहीं
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बैंगलोर

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Ram Naresh Gautam

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Updated: 28 Aug 2018, 6:11 PM IST

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वचन संपदा का सदुपयोग करें, दुरुपयोग नहीं

बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, चिकपेट शाखा के तत्वावधान में गोड़वाड़ भवन में उपाध्याय रविंद्र मुनि के सान्निध्य में रमणीक मुनि ने कहा कि मनुष्य जीवन का एक लक्ष्य यह भी होना चाहिए कि वह वचन संपदा का सदुपयोग करें, दुरुपयोग नहीं। उन्होंने कहा कि इस वाणी को चिंतामणि बनाएं, कोयले की खान नहीं।

शब्दों का इस्तेमाल विवेक पर आधारित है। वाणी के 8 गुणों को अंगीकार करके एक सामान्य व्यक्ति भी गुणवान हो जाता है। सत्य अपने आप में पूर्ण है। सत्य को भी अच्छे मीठे अंदाज में बोलना चाहिए। वह सत्य नहीं बोलना चाहिए जो अप्रिय होता है यानी जिसे सुनने के बाद किसी को चोट पहुंचे, ऐसा सत्य नहीं बोलना चाहिए। यह व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावित करता है। बोलने मात्र से सम्मान घट और बढ़ सकता है।

इस मौके पर ऋषि मुनि ने गीतिका प्रस्तुत की। रविंद्र मुनि ने मांगलिक प्रदान की। महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने संचालन किया। मार्गदर्शक सम्पतराज धारीवाल ने बताया कि चौमुखी जाप के लाभार्थी सरदारबाई किरण बाई सुरेश मूथा परिवार के सदस्यों का पंचरंगी जैन दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया।सभा में गायक कलाकार विक्की पारेख ने मुनिवृन्द से आशीर्वाद लिया। हनुमंतनगर संघ के अध्यक्ष हुक्मीचंद कांकरिया ने 32 उपवास का पचकान लिया।

नारकीय भी करते हैं क्षणिक सुख का अनुभव
हिरीयूर (चित्रदुर्गा) . राजेन्द्र भवन में आचार्य कीर्तिप्रभ सूरीश्वर के सान्निध्य में मुनि संयमप्रभ सागर ने सोलहवें तीर्थंकर शांतिनाथ के जीवन चरित्र व उनके केवलज्ञान कल्याणक पर चर्चा की। मुनि ने कहा कि जब तीर्थंकर के पांचों ही कल्याणकों पर स्वर्ग के देवता, चौसठ इंद्र आदि खुशियां मनाते हैं, तब नरक के नारकीय भी अपने दुष्कृत कर्म भोगते हुए उस समय क्षणिक सुख का अनुभव करते हैं।

उन्होंने कहा कि सातों ही नरक के नारकीय उस वक्त बहुत ही सुख का अनुभव करते हुए क्षणिक खुशी का इजहार करते हैं और समझते हैं कि कोई तीर्थंकर का कल्याणक है। उपासक दीपचंद बोकडिय़ा ने बताया कि मुनि तपप्रभ सगर ने संगीत की मधुर स्वरी बिखेरे और ज्ञानार्थियों को संगीत का ज्ञान करवाया। मुनि संयमप्रभ सागर तीर्थंकर एवं चक्रवर्ती प्रभु शान्तिनाथ पर नियमित प्रवचन दे रहे हैं।

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