
All the ventilators of the district hospital closed, serious patients
- 10 फीसदी से अधिक बच्चों पर कुपोषण की मार
- आंगनवाडी केंद्रों का हाल
बेंगलूरु. राज्य के आंगनवाड़ी केंद्रों में नामांकित छह वर्ष से कम उम्र के 10 प्रतिशत से अधिक बच्चे कुपोषित हैं। संभावित तीसरी लहर के खतरे की पृष्ठभूमि में, राज्य सरकार ने मई में एक सर्वेक्षण किया था ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने बच्चे कुपोषण से पीडि़त हैं और उन्हें महामारी से बचाने के लिए क्या कदम उठाने की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार सर्वेक्षण में शामिल 40,53,022 बच्चों में से 10.50 प्रतिशत सामान्य रूप से कुपोषित हैं और 0.19 प्रतिशत बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं। हालांकि, 89.32 फीसदी बच्चे सामान्य हैं।
4,25,369 सामान्य रूप से कुपोषित बच्चों में से 1,92,377 कल्याण कर्नाटक क्षेत्र से हैं। इस क्षेत्र में बीदर, कलबुर्गी, यादगीर, रायचूर, कोप्पल और बल्लारी शामिल हैं। गंभीर रूप से कम वजन वाले 7,627 बच्चों में से 3,356 या 51 प्रतिशत राज्य के इन हिस्सों से ही हैं।
बेलगावी जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। यहां 57,444 मध्यम कुपोषित और 658 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे हैं। इसके बाद बल्लारी, रायचूर, कोप्पल, विजयपुरा और यादगीर जिले हैं। कोडुगू जिले में सामान्य से कम वजन वाले बच्चों की संख्या सबसे कम हैं।
तीसरी लहर से बचाना जरूरी
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सोमशेखर के अनुसार कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को तीसरी लहर से बचाना जरूरी है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होने के कारण इनके चपेट में आने की आशंका सर्वाधिक है। कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर ऐसे बच्चे निमोनिया की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। इसके साथ ही इन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है।
कुपोषित बच्चों के खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। बच्चों को अंकुरित चने, दूध, दही, रोटी और फल आदि उसकी आयु वर्ग की कैलोरी के हिसाब से देने होंगे। अधिक समय तक तेज बुखार, आंख लाल होना, हाथ-पैरों में सूजन, पेट संबंधी समस्या, शरीर पर चकत्ते या लाल दाने होना आदि लक्षण मिलते हैं तो तत्काल चिकित्सकों की सलाह लेनी चाहिए।
Published on:
20 Jul 2021 09:24 pm
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