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‘हम किंडरगार्टन से ही बच्चों में तनाव पैदा कर रहे हैं’

- आज मांओं को भी स्वास्थ्य संबंधी बहुत सारी समस्याएं हो रही हैं। पहले ये सारी समस्याएं हमें 50 साल की उम्र के बाद देखने को मिलती थीं

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‘हम किंडरगार्टन से ही बच्चों में तनाव पैदा कर रहे हैं’

‘हम किंडरगार्टन से ही बच्चों में तनाव पैदा कर रहे हैं’

'एक दिन एक मां सीने में दर्द, चिंता, अवसाद के साथ आईं। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे को अच्छे अंक नहीं मिल रहे हैं। मुझे लगा कि बच्चा 10वीं या 12वीं कक्षा में होगा। मां ने बताया कि उनका बच्चा एलकेजी में है।’ आज मांओं को भी स्वास्थ्य संबंधी बहुत सारी समस्याएं हो रही हैं। पहले ये सारी समस्याएं हमें 50 साल की उम्र के बाद देखने को मिलती थीं।

बच्चों की शिक्षा मां की परीक्षा

जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवस्कुलर साइंसेस (Jaideva Institute of Cardiovascular Sciences) के निदेशक डॉ. सी. एन. मंजूनाथ (Dr. C. N. Manjunath) ने बेंगलूरु सिटी विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में यह कही। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आज बच्चों की शिक्षा मां की परीक्षा बन गई है। हम किंडरगार्टन से ही बच्चों में तनाव पैदा कर रहे हैं। शिक्षा नीति में बदलाव की जरूरत है। सात वर्ष की उम्र या पहली कक्षा तक बच्चों के लिए स्कूल सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 12.30 बजे तक ही होनी चाहिए।

तनाव प्रबंधन बचपन से ही

बच्चे न ठीक से खा पाते हैं, न सो पाते हैं और न खेल पाते हैं। जानवरों की तरह बच्चों को स्कूल बसों (school bus) में ठूंसा जाता है। 20-25 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते ये बच्चे 70 साल के वृद्ध जैसे दिखने लगते हैं। तनाव प्रबंधन (stress management) बचपन से ही शुरू करना होगा।