
हम स्वयं को नहीं दूसरों को देखते हैं-साध्वी डॉ. उदितप्रभा
बेंगलूरु. जय ब्रज मधुकर अर्चना चातुर्मास समिति के तत्वावधान में साध्वी डॉ.सुप्रभा के सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में साध्वी डॉ.उदितप्रभा ने कहा कि स्वयं श्रेष्ठ बनो। इसके लिए हमको स्वयं को देखना परखना है और स्वयं का निरीक्षण एवं परीक्षण करना है। स्वयं को पहचानना यह इंसान के लिए सबसे बड़ी मुश्किल चुनौती है। जब हम स्वयं को पहचान जाएंगे तो आत्मा में निर्मलता का प्रवेश शीघ्र हो जाएगा। लेकिन विडंबना यह है कि हम स्वयं को नहीं देखते दूसरों को देखते हैं। स्वयं अवगुण का पिटारा है फिर भी हमारे दुर्गुणों की ओर हमारा ध्यान नहीं जाता है। हमें दूसरों के तिल जैसे दोष भी ताड़ जैसे दिखाई देते हैं और स्वयं के ताड़ जैसे दुर्गुण भी तिल जैसे दिखाई देते हैं। साध्वी ने कहा कि व्यक्ति स्वयं श्रेष्ठ बन गया तो समाज परिवार देश स्वत ही श्रेष्ठ खुशहाल बन जाएगा। साध्वी ने कर्नाटक गजकेसरी गणेशलाल की 143 वी जयंती पर गुणानुवाद करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। प्रारंभ में साध्वी डॉ. इमितप्रभा ने उत्तराध्ययन सूत्र के नवमी अध्ययन नमी राजर्षि पर विवेचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह अध्ययन प्रेरणा करता है कि निश्चय में मेरा कोई नहीं, मैं किसी का नहीं। और व्यवहार में मैं सबका और सब मेरे का भाव जीवन का एक हिस्सा है। शरीर जड़ है और आत्मा चेतन है। सच्चा साधक वही है जो मान अपमान यश अपयश संयोग वियोग में अपने को समभाव में स्थिर रखता है। इस अवसर पर शिवाजीनगर संघ की ओर से पारसमणि रुणवाल ने कर्नाटक गजकेसरी गणेशीलाल के गुणगान किए। चातुर्मास समिति के अध्यक्ष पुखराज बोथरा ने स्वागत किया। चातुर्मास समिति के महामंत्री मनोहरलाल लुकड् ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर चेन्नईं, कोयंबतूर आदि अनेक शहरों से गुरु भक्त धर्म सभा में उपस्थित थे।
Published on:
30 Oct 2022 07:15 pm
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