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जहां तर्क है, वहां नरक है

बाहुबली ने जैसे ही झुकने के लिए पैर उठाया तो केवलज्ञान की प्राप्ति हो गई।
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बैंगलोर

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Ram Naresh Gautam

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Updated: 28 Oct 2018, 4:53 PM IST

rajajinagar

जहां तर्क है, वहां नरक है

बेंगलूरु. राजाजीनगर स्थानक में साध्वी संयमलता के सान्निध्य में साध्वी कमलप्रज्ञा ने उत्तराध्ययन सूत्र के मूल पाठ का वाचन किया।
सभा में साध्वी अमितप्रज्ञा ने कहा कि जीवन में विनय का विशेष महत्व है। विनय अर्थात झुकना।

बाहुबली ने जैसे ही झुकने के लिए पैर उठाया तो केवलज्ञान की प्राप्ति हो गई। जहां तर्क है, वहां नरक है। जहां समर्पण है वह स्वर्ग है। साध्वी संयमलता ने उत्तराध्ययन सूत्र के दूसरे अध्ययन का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान महावीर के द्वारा बताए गए 22 परिषहों में दुनिया के सारे कष्ट समावेश हो जाते हैं। परिषह विजय धर्म है। दोपहर में मंगल कलश के आकार में महिलाओं ने पुच्छिस्सुणं स्तोत्र का जाप किया।

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अनर्थ के पापों से बचना चाहिए
जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में महावीर धर्मशाला में जयधुरन्धर मुनि ने श्रावक के 12 व्रतों के 8वें व्रत का विवेचन करते हुए कहा कि पाप का सेवन दो प्रकार से किया जाता है। एक व्यक्ति अपनी आवश्यकतााअें की पूर्ति के लिए मजबूरी में पाप करता है, जबकि दूसरा व्यक्ति ऐसा होता है जो अनावश्यक ही मौज मस्ती के लिए पापों का सेवन करता जाता है।

उन्होंने कहा कि अज्ञानता के कारण वह निष्प्रयोजन पापों का बंध कर अपनी आत्मा को भारी बना डालता है। ऐसे पाप निश्चित ही आत्मा को पतन की ओर ले जाते हैं। इसलिए अनर्थ के पापों से बचना चाहिए।

अनर्थ के पापों का दंडभी इस आत्मा को भोगना ही पड़ता है, अत: सावधानी रखनी चाहिए। प्रारंभ में जयपुरन्दर मुनि ने उत्तराध्ययन सूत्र की वाचना देते हुए कहा कि सूत्र में सार रहता है एवं रहस्य भरा होता है। सभा में जलगांव में सुमर मुनि के देवलोकगमन पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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