
जिसके दिल में दया नहीं, उसका जीवन व्यर्थ
मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थनगर सीआइटीबी परिसर में श्रुत मुनि ने 'आत्म दयावान बनोंÓ का वर्णन करते हुए कहा कि दया धर्म का मूल है, मूल पाप अभिमान। व्यक्ति यदि बहुत पढ़ा लिखा, डिग्रीधारी या उच्चशिक्षित हो परन्तु यदि उसके दिल में दया का समावेश नहीं है तो उसका जीवन व्यर्थ है। विद्या के साथ में यदि दया का समावेस हो तो व्यक्ति का सम्मान, ज्ञान एवं पदनाम, विनय में बढ़ोतरी निश्चित है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति में जिस समय पौषध, सामायिक, सयंम, दया के व्रत आते है तो सबसे ज्यादा खुशी छह काया के जीवो को होती है। छह काया के जीवों को अभयदान मिलता है। दया धारण करने के लिए जीवन में पृथ्वी की तरह सहनशीलता का वास करते हुए विचारों में दृष्टि में जल के समान पवित्रता को जीवन में उतारते हुए अग्नि की तरह तेजस्वी, अंधकार का नाश करने एवं प्रकाशवान बनना, अपना तेज प्रकट करना, वायु, हवा की तरह सरल बनना, वनस्पतिकाय की तरह दया, नम्रता का भाव ग्रहण करना एवं त्रस काय से जाग्रत एवं सजग बनने की प्रेरणा को जीवन में अपनाना चाहिए।
मंगलवार को अक्षर मुनि के 31 उपवास की तपस्या गतिमान रही एवं चेतन प्रकाश दरडा के 12 की तपस्या, रमेश नंदावत, कुसुमबाई बाबेल के सिद्धि तप की लड़ी में 36 उपवास गतिमान हैं एवं लगभग 25 अ_ाईया चल रही है। महिला मंडल द्वारा मंगलगीत का आयोजन किया गया। गांधी जयंती के उपलक्ष्य में महात्मा गांधी का गुणानुवाद किया गया। साध्वी प्रकाशकवंर का प्रथम स्मरण दिवस सामायिक दिवस के रूप में मनाया गया।
क्षत्रिय कुमावत समाज की कार्यकारिणी गठित
मैसूरु. शहर के भोगादी स्थित क्षत्रिय कुमावत समाज के तत्वावधान में आयोजित वार्षिक आमसभा में सर्वसम्मति से गणेशलाल धनारिया को अध्यक्ष चुना गया। नई कार्यकारिणी में कोषाध्यक्ष लिखमाराम पिलोदिया, सचिव चिरंजीलाल सागर, सह सलाहकार मनोहरलाल सांगर को मनोनीत किया। अध्यक्ष गणेशलाल ने धन्यवाद देते हुए सभी को जिम्मेदारी पूरी तरह से निभाने का भरोसा दिलाया। सभा में हासन, गुंडलपेट, एचडी कोटे आदि स्थानों से समाजबंधुओं ने भाग लिया।

Published on:
03 Oct 2018 04:08 pm
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