
इस्लाम का सबसे पवित्र महीना माह-ए-रमजान रविवार को पहले रोजे के साथ शुरू हो गया। इबादत और बरकत का यह महीना मुसलमानों के लिए बेहद खास माना जाता है। एक माह तक मुस्लिम धर्म के लोग रोजा रखकर और नमाज अदा कर खुदा की इबादत करेंगे। रमजान के दौरान रोजेदार सुबह में सहरी के साथ रोजे की शुरूआत करेंगे और दिन भर रोजा रख शाम को इफ्तार कर रोजा तोड़ा जाएगा। अब्दुला-बिन-जुबेर मस्जिद, पंपानगर, यशवंतपुर के मौलाना मो. मंजर ने कहा कि रमजान बरकत का पाक महीना माना जाता है। इस माह में रोजा रखने वाले को कई गुणा सवाब मिलता है। रमजान के महीने का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है।
पहले दिन रोजेदारों ने पूरे अकीदत के साथ खुदा की इबादत की। बड़ों के साथ छोटे बच्चों ने भी रोजा रखा। सुबह में सहरी व शाम में इफ्तार कर रोजा खोला गया। उधर, बाजारों में भी रमजान की खरीदारी की भीड़ लगी रही। पहला रोजा होने के कारण खजूर, शर्बत, मौसमी फलों आदि की खरीदारी की गई। इफ्तार का पकवान बनाने को लेकर राशन की दुकानों में भी लोगों ने खरीदारी की। यशवंतपुर के दुकानदार मो. कलीम ने बताया कि खजूर रोजा खोलने के लिए सबसे पसंदीदा चीज मानी जाती है। इसके साथ शर्बत भी रोजेदार काफी पसंद करते हैं। खजूर की कई वैराइटी उपलब्ध है। ईरान और खाड़ी देशों से आयातित खजूर की कीमत 120 से 140 रुपए तक है। फलों के दाम भी पहले से अधिक चढ़े रहे।------ बॉक्स-- फोटो - मौलाना मो. मंजर सिंगल कॉलम---------
मौलाना मो. मंजर ने बताया कि रमजान का महीना 30 दिनों का होता है, जिसे तीन अशरों में बांटा गया है। दस-दस दिनों का एक अशरा होता है। इसमें पहला अशरा रहमत, दूसरा असरा मगफिरत (गुनाहों की माफी) और तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से खुद को बचाने के लिए होता है। ऐसा माना जाता है कि रमजान के पहले अशरे में जो लोग रोजा रखते हैं और नमाज अदा करते हैं, उन पर अल्लाह की रहमत बरसती है। दूसरे अशरे में जो अल्लाह की इबादत करते हैं और अल्लाह उनके गुनाहों को माफ कर देते हैं। वहीं, आखिरी और तीसरे अशरे की इबादत और रोजा से जहन्नुम या दोजख से खुद को बचाया जा सकता है। रमजान महीना में सभी रोजेदारों को गुनाहों से तौबा मांगनी चाहिए और दूसरों के ऊपर रहम करनी चाहिए। गरीबों, असहायों व यतीमों के लिए इस माह में जकात और फितरा निकालना चाहिए।
Published on:
03 Mar 2025 08:59 pm
बड़ी खबरें
View Allबैंगलोर
कर्नाटक
ट्रेंडिंग
