
मंत्रिमंडल विस्तार : 14 विधायक बनाए जा सकते हैं मंत्री, दो पद रिक्त रख सकते हैं येडि!
बेंगलूरु. विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आने के तीन सप्ताह बाद भी मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो सका है। नए व पुराने विधायकों को लेकर द्वंद और समीकरणों को साधने की चुनौती के कारण भाजपा अभी विस्तार को लेकर कोई निर्णय नहीं ले पाई है। मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा पहले ही उपचुनाव में जीते 12 में से 11 विधायकों को मंत्री बनाने की बात दुहरा चुके हैं लेकिन विस्तार में शामिल किए जाने वाले बाकी मंत्रियों को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई है। काफी संख्या में पार्टी के वरिष्ठ और पुराने विधायक भी मंत्री पद के दावेदार हैं।
उपचुनाव में जीते नेताओं को उम्मीद थी कि उन्हें जल्द ही वादे के मुताबिक मंत्री बनाया जाएगा लेकिन उनकी प्रतीक्षा बढ़ती जा रही है। पहले मकर संक्रांति के बाद मंत्रिमंडल विस्तार किए जाने की चर्चा थी लेकिन इसी बीच सरकार ने विधानमंडल का बजट अधिवेशन भी आहूत करने का निर्णय ले लिया। इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि विस्तार संभवत: अधिवेशन के बाद होगा। इस बीच, अब येडियूरप्पा के पांच दिवसीय विदेश दौरे पर जाने और अधिवेशन सप्ताह भर टलने की चर्चाओं के बीच मंत्रिमंडल विस्तार जनवरी महीने के अंत में होने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि भाजपा आलाकमान मंत्रिमंडल विस्तार में देरी कर पार्टी को पुराने विधायकों को राजी करने की कोशिश भी कर रहा है। येडियूरप्पा वादे के मुताबिक उपचुनाव में जीते अयोग्य ठहराए गए 11 पूर्व विधायकों को मंत्री बनाने की बात पर अडिग बताए जाते हैं लेकिन उनके लिए पार्टी के पुराने नेताओं की उपेक्षा करना संभव नहीं है। ऐसे दावेदारों की संख्या काफी है लेकिन सबको मंत्री बनाना संभव नहीं है। राज्य में अधिकतम 16 नए मंत्री बनाए जा सकते हैं लेकिन उपचुनाव में जीते 11 विधायकों को मंत्री बनाने के बाद सिर्फ 5 पद ही भाजपा के पुराने नेताओं के लिए बचते हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सिर्फ पांच पुराने नेताओं को मंत्री बनाने से मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जातीय समीकरण और क्षेत्रीय आधार पर संतुलन बनाना संभव नहीं होगा। सूत्रों का कहना है कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए पार्टी आलाकमान कुछ मौजूदा मंत्रियों को हटाने और उनकी जगह नए चेहरों को मौका देने पर विचार कर रहा है।
बताया जाता है कि विस्तार के साथ ही मंत्रिमंडल का पुनर्गठन भी किया जाएगा। इसमें चार-पांच मंत्रियों को हटाकर नए लोगों को शामिल किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि 16 में से 14 रिक्त पदों को ही अगले विस्तार में भरे जाने की संभावना है जबकि बाकी दो पद रिक्त रखे जाएंगे। सूत्रों का कहना है कि पार्टी इससे मंत्री पद पाने से वंचित नेताओं के बीच उम्मीद बनाए रखना चाहती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जुलाई में एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के पतन से पहले कांग्रेस और जनता दल-एस के 17 विधायकों ने इस्तीफे दिए थे और उन्हें अयोग्य ठहरा दिया गया था। इनमें से 15 सीटों पर ही उपचुनाव कराए गए थे जबकि राजराजेश्वरी नगर और मस्की में उच्च न्यायालय में चुनाव याचिकाएं लंबित रहने के कारण उपचुनाव नहीं कराए गए थे। राजराजेश्वरी नगर के विधायक रहे मुनिरत्ना और मस्की के विधायक रहे प्रताप गौड़ा पाटिल से किए वादे के मुताबिक येडियूरप्पा मंत्रिमंडल में दो पद रिक्त रखने के पक्ष में हैं।
विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन रखना भी बड़ी चुनौती है। पार्टी नेताओं का कहना है कि दक्षिण कन्नड़ जिले के छह विधायकों में से कम से कम एक को मंत्री बनाने के लिए काफी दबाव है। तटवर्ती इलाका भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है और पार्टी के प्रदेश स्तरीय नेता विस्तार में इस क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने का दबाव है।
Published on:
30 Dec 2019 06:27 pm
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