12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ओपिओइड विदड्रॉल से उबरने में योग अत्यंत कारगर

इस अध्ययन में 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के 59 वयस्कों को शामिल किया गया, जिन्हें दो समूहों में विभाजित किया गया था। पहले समूह को मानक चिकित्सीय उपचार के साथ दो सप्ताह के भीतर 10 सत्रों में प्रतिदिन 45 मिनट योग अभ्यास कराया गया। दूसरे समूह को केवल दवाओं के माध्यम से उपचार दिया गया।

2 min read
Google source verification

file photo

- नशा मुक्ति के इलाज में जगी नई उम्मीद

नशा मुक्ति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शोध में सामने आया है कि योग ओपिओइड (अफीम वर्ग) नशे से होने वाले विदड्रॉल लक्षणों से उबरने की प्रक्रिया को काफी तेज कर सकता है। राष्ट्रीय मानसिक आरोग्य व स्नायु विज्ञान संस्थान (निम्हांस) के सेंटर फॉर एडिक्शन मेडिसिन की ओर से किए गए इस अध्ययन के अनुसार योग अपनाने से मरीज लगभग आधे समय में ही विदड्रॉल से बाहर आ जाते हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन दुनियाभर में ओपिओइड Opioid नशे से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है और भविष्य में योग को नशा मुक्ति उपचार का नियमित हिस्सा बनाया जा सकता है।

दवाओं के साथ योग भी

इस अध्ययन में 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के 59 वयस्कों को शामिल किया गया, जिन्हें दो समूहों में विभाजित किया गया था। पहले समूह को मानक चिकित्सीय उपचार के साथ दो सप्ताह के भीतर 10 सत्रों में प्रतिदिन 45 मिनट योग अभ्यास कराया गया। दूसरे समूह को केवल दवाओं के माध्यम से उपचार दिया गया।

शोध के अनुसार, जिन मरीजों ने दवाओं के साथ-साथ योग का अभ्यास किया, वे औसतन 5 दिनों में विदड्रॉल लक्षणों से उबर गए, जबकि केवल दवाओं पर निर्भर मरीजों को 9 दिन लगे। यानी योग के साथ इलाज करने पर स्वस्थ होने की गति लगभग दोगुनी रही। नींद बेहतर, चिंता और दर्द में कमी अध्ययन में शामिल मरीजों ने बताया कि योग अभ्यास से उनकी नींद में सुधार हुआ, चिंता कम हुई और शारीरिक दर्द भी घटा। इसके अलावा, योग समूह में हृदय गति अधिक स्थिर, तथा शारीरिक और मानसिक लक्षणों में उल्लेखनीय कमी देखी गई। शोधकर्ताओं के अनुसार, नशा छोड़ने के दौरान शरीर की तनाव प्रतिक्रिया अत्यधिक बढ़ जाती है, जिसे योग प्रभावी ढंग से शांत करता है।

विशेषज्ञों की राय

निम्हांस Nimhans के इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग में इस शोध का नेतृत्व करने वाले डॉ. हेमंत भार्गव ने बताया कि योग शरीर और मन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है, जिससे विदड्रॉल के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। 45 मिनट का सरल योग सत्र अध्ययन के दौरान मरीजों को रोजाना 45 मिनट का योग सत्र कराया गया, जिसमें हल्के आसन, प्राणायाम और विश्राम तकनीकें शामिल थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभ्यास आसानी से अस्पतालों के उपचार कार्यक्रमों में शामिल किया जा सकता है।

विकल्प नहीं, बल्कि सहायक उपाय

शोध में यह भी स्पष्ट किया गया कि योग नर्वस सिस्टम को शांत करने, तनाव कम करने और रिलैप्स (दोबारा नशे की ओर लौटने) के खतरे को घटाने में सहायक है। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट किया कि योग को चिकित्सीय उपचार का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक उपाय के रूप में ही अपनाया जाना चाहिए।